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दस तस्वीरों में करें कर्तव्य पथ का दीदार: पहली शाम रही आम लोगों के नाम, सैलानी घंटों निहारते रहे मनमोहक नजारे

Sat, 10 Sep 2022 03:55 AM IST
आकाश दुबे आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Sat, 10 Sep 2022 03:55 AM IST
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On first evening on Kartavya path people saw drone show people spend many hours
कर्तव्य पथ पर रंगारंग कार्यक्रम का हुआ आयोजन - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला

कर्तव्य पथ की पहली शाम आम लोगों के नाम रही। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ पर लगी रंगबिरंगी लाइटों को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। करीब दो साल के बाद शुक्रवार की शाम सैलानियों ने इंडिया गेट का नजदीक से दीदार किया। बड़ी संख्या में लोग इंडिया गेट को एक टक निहारते रहे। लोगों ने सेल्फी खींचीं, लाइट शो का आनंद उठाया, देश के विभिन्न राज्यों के लोक संगीत और नृत्य का लुत्फ उठाया। दरअसल, कोविड काल की बंदिशों के बाद पहली बार आम लोग कर्तव्य पथ से होते हुए इंडिया गेट के नजदीक तक पहुंचे। करीब दो साल बाद यहां पहुंचने की खुशी भी उनके चेहरों पर साफ दिख रही थी। दिलचस्प यह कि इस बीच इंडिया गेट की रौनक पूरी तरह से बदल गई है। सबकुछ अत्याधुनिक और चकाचौंध करने वाला था।

On first evening on Kartavya path people saw drone show people spend many hours
कर्तव्य पथ पर रंगारंग कार्यक्रम का हुआ आयोजन - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला

साकेत के अंकित शुक्रवार शाम इसमें पूरी तरह डूबे हुए भी थे। अहसास के सवाल पर पहले उन्होंने ठहाका लगाया फिर बोले, इंडिया गेट पर पहले भी लाइटिंग थी, लेकिन पहले ऐसी लाइटिंग नहीं होती थी। तिरंगे वाली लाइट, एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए लाल पत्थरों से बना सबवे सबकुछ बहुत सुंदर है। नोएडा से आए दीपक ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगाकर सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। पहले लगता था कि सरकार सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में पैसे की बर्बादी कर रही है, लेकिन यहां आकर ऐसा लगता है कि सरकार ने पैसों का सही उपयोग किया है। यहां की भीड़ देखकर लगता है कि किसी मेले में आए हैं।

On first evening on Kartavya path people saw drone show people spend many hours
तिरंगे की रोशनी में नहाया फव्वारा - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला

सैलानियों को बेहतरीन लग रहा कर्तव्य पथ
सैलानियों को राजपथ से कर्तव्य पथ पर चले जाना बेहतरीन लग रहा है। उत्तराखंड के रहने वाले अनिल उनियाल ने कहा कि यहां आकर देश के नागरिकों को अपने कर्तव्यों का एहसास होगा। दरअसल, नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक 3.2 किलोमीटर तक सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का री-डेवलपमेंट किया गया है। इसके बाद इसकी खूबसूरती पहले से कई गुना अधिक बढ़ गई है। साल 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किया। नई दिल्ली की प्रमुख इमारतों को विकसित करने का जिम्मा एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को मिला। इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया। इसी प्रोजेक्ट के तहत राजपथ का निर्माण भी किया गया। बाद में 1921 में इंडिया गेट की नींव रखी गई। देश की आजादी के बाद इंडिया गेट दिल्ली के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया। इतने सालों के बाद भारत सरकार ने सेंट्रल विस्टा का पुनर्विकास कराया।

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On first evening on Kartavya path people saw drone show people spend many hours
कर्तव्य पथ पर ड्रोन शो का आनंद लेते लोग - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला

रंग बिरंगी लाइट से नहाया कर्तव्य पथ
सूरज ढलते ही कर्तव्य पथ रंगीन लाइटों से नहा उठा। दूर तक सफेद लाइटों की दो कतारें, बीच में हरी और केसरिया लाइटें मनोहारी लग रही थीं। लाइट जलने पर सैलानियों की भीड़ ने सीटियां बजाकर इसका स्वागत किया। इंडिया गेट और लाइटों के साथ सेल्फी लेने की होड़ लगी हुई थी।

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कर्तव्य पथ का दीदार करने पहुंचे लोग - फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला

विभिन्न राज्यों के लोकगीत-नृत्य की प्रस्तुति
इंडिया गेट पर शाम से देश के विभिन्न राज्यों के लोकगीत संगीत की जबरदस्त प्रस्तुति हुई। लोगों ने लाइट शो के साथ संगीत की प्रस्तुति का आनंद उठाया। मध्य प्रदेश के सागर से आए लोक कलाकारों के समूह ने भगवान कृष्ण के जन्म का बधाई नृत्य प्रस्तुत किया। झारखंड के गुमला से आए कलाकारों ने कलशादंश नृत्य प्रस्तुत किया। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत किया। नागपुर से आए कलाकारों ने ढोल ताश कथक की प्रस्तुति की। 

घंटों पानी में पैर डालकर बैठे रहे सैलानी 
इंडिया गेट के लॉन में बने तालाब के किनारे सैलानी घंटों तक पानी में पैर डालकर सुकून का एहसास करते रहे। लोग अपने परिवार के साथ आए हुए थे। बच्चे दौड़भाग करते, लोग परिवार के साथ फोटो खींचते और आपस में गुफ्तगू करते दिखाई दिए।

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