बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों के बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैयारी नहीं है। चोरों से बचाव के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर थाने में जमा है। जहां ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं भी तो इनका अभी तक उपयोग नहीं हुआ है। ऐसे में मौका पड़ने पर यह काम करेंगे भी या नहीं, इस पर भी सवाल है।
Corona in Noida: ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पुलिस चौकी में, कोविड से कैसे बचे जान
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थाने की सुरक्षा में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
बिलासपुर। कस्बे से लगभग दो किलोमीटर दूर जंगल में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था फैली है। विधायक के प्रयास से कोरोना काल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन, सैनिटाइजशेन मशीन, वाटर आरओ, बिजली आदि की व्यवस्था की गई थी। अस्पताल में चौकीदार न होने के कारण पीएचसी में रखे सामान चार उड़ा ले जाते हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की सुरक्षा के लिए उसे बिलासपुर कस्बे की पुलिस चौकी में रखवाया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर न होने के चलते मरीज भी कम ही आते हैं। यह अस्पताल दनकौर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है। डॉ. नारायण किशोर का कहना है कि बिलासपुर में डॉ. रमेश और डॉ. अनुराग की तैनाती है। निवासियों का कहना है कि अधिकांश वार्डबॉय ही मरीजों को दवाई देता है।
मरीजों को नहीं मिल पा रहा उपचार
रबूपुरा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना काल के दौरान कोविड-19 वार्ड जैसी सुविधाएं देने का जन प्रतिनिधियों ने वादा किया गया था, लेकिन आज भी सुविधाएं नहीं मिलीं। कोरोना संक्रमण के मामले आ रहे हैं, लेकिन मरीजों को उपचार पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। कुछ दवाई डॉक्टर बाहर से लाने के लिए कहते हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर आरटीपीसीआर एवं एंटीजन जांच उपलब्ध है परंतु भर्ती कर उपचार की सुविधा नहीं है।
500 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट देगा आपूर्ति
कोरोना काल में सामुदायिक केंद्र पर सुविधाएं न मिलने पर जन प्रतिनिधियों ने सीएसआर के माध्यम से 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. नरेन्द्र तिवारी ने बताया 40 से 60 मिनट के अंदर प्लांट 90 प्रतिशत ऑक्सीजन आपूर्ति कर सकेगा। स्वास्थ्य केंद्र पर 50 नए बैड तैयार हैं। यहां 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा हुआ है। बारिश के बाद परिसर में जलभराव की समस्या बनी हुई है।
विशेषज्ञ के अभाव में धूल फांक रहीं अल्ट्रासाउंड मशीन
दादरी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 250 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो गया है। यहां पर बड़ी संख्या में 130 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 60 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। यहां भी डॉक्टरों की कमी है। मरीजों को समय रहते उपचार नहीं मिल पा रहा है। पिछले 6 माह से अल्ट्रासाउंड मशीन रखी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं।