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निठारी कांड के 11वें मामले में भी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, जानिए क्या था मामला

Sat, 06 Apr 2019 06:00 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 06 Apr 2019 06:00 PM IST
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Nithari case surendra koli sentenced to death in eleventh case also fine of 1 lakh 10 thousand
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

नोएडा के निठारी कांड से जुड़े 11वें मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुना दी है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर एक लाख दस हजार का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत ने मुख्य अभियुक्त सुरेंद्र कोली को बच्ची की हत्या, दुष्कर्म की कोशिश, अपहरण और सबूत नष्ट करने की धाराओं में दोषी करार दिया था। केस के सह अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंधेर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

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सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि अदालत में निठारी कांड के 11वें मामले में (10 वर्षीय बच्ची की हत्या) में अभियुक्त सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर के मामले में फैसला सुनाया था। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, दुष्कर्म की कोशिश और साक्ष्य मिटाने का दोषी कोर्ट ने माना है, जबकि अदालत ने पंधेर को इस केस में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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इससे पहले भी कोली को 10 केसों में फांसी की सजा मिल चुकी है, जिसमें से एक केस में हाईकोर्ट ने कोली की अर्जी पर उसे राहत देते हुए आजीवन कारावास में बदल दिया था।

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क्या था 11वां मामला

नोएडा के निठारी गांव की रहने वाली 10 वर्षीय बच्ची अपने माता-पिता के साथ रहती थी। उसके पिता निठारी में ही कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते थे। बच्ची भी पिता की इस काम में मदद करती थी।

21 जून 2005 को बच्ची सुबह घर से कहकर निकली थी कि वह अपनी चुन्नी पर पीको कराकर आ रही है, जिसके बाद से वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने शाम को देखा कि बेटी गायब है। इसके बाद उसके पिता ने गांव में ही लाउड स्पीकर से घोषणा कर उसे तलाशा, लेकिन वह नहीं मिली तो उन्होंने 23 जून 2005 को नोएडा सेक्टर-20 थाने में दी तहरीर में बताया उसकी बेटी गायब है।

इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करते हुए जांच शुरू की। निठारी की डी-5 कोठी में खुदाई के दौरान बच्ची के कपड़े, चप्पल और अन्य सामान बरामद हुआ। कंकाल के डीएनए का मिलान उसके परिजनों से हुआ।

सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। नौ अप्रैल 2008 को सीबीआई ने चार्जशीट पेश की। मुकदमे में कुल 284 तारीखें लगी, जिसके बाद अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 38 गवाह पेश किए गए जबकि बचाव पक्ष की तरफ  से केवल दस्तावेज दिए गए।



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