6 साल पहले भारत की राजधानी में 16 दिसंबर 2012 की उस ठंडी रात को ऐसी दरिंदगी को अंजाम दिया गया, जिससे न सिर्फ पूरा देश आक्रोश से उबल उठा था बल्कि बड़ी संख्या में बच्चे, नौजवान और बूढ़े सभी सड़कों पर उतर आए थे। महिलाएं पहली बार अपने हक के लिए सड़कों पर उतरी थीं और देश की संसद से लेकर विश्व मीडिया में भारत की महिलाओं की स्थिति पर बहस तेज हो गई थी। उस काली रात में दिल्ली की सड़कों पर DL 1PC 0149 नंबर की बस दौड़ती रही और हैवानियत की सारी हदें पार होती रहीं। किसी को पता न चला। वो बस जो निर्भया की जिंदगी का काल बन गई आज ऐसी अवस्था में है कि उसे देखकर कोई भी सच में डर जाए। आइए जानते हैं कि निर्भया गैंगरेप में इस्तेमाल हुई उस बस का आज कैसा है हाल...
निर्भया कांड के 6 सालः उस बस में आज भी मौजूद हैं दरिंदगी के निशां, जिससे दहल गया था पूरा देश
दिनेश यादव नाम के शख्स पर रजिस्टर ये बस उसे फिर कभी वापस नहीं मिली। इस बस को देखकर आपको आज भी यही लगेगा कि जैसे ये खुद निर्भया से होने वाली दरिंदगी की दास्तां चीख-चीख कर आपको बता रही हो। बस के अंदर घुसते ही आपको बस का ओडोमीटर दिखाई देगा जिसमें आपको 2,26,784 किलोमीटर दिखाई देगा। यानी इस कांड से पहले यह बस इतने किलोमीटर चल चुकी थी।
बस के डैशबोर्ड और इंजन पर जंग लग चुका है और डैशबोर्ड के पास सीट के नीचे एक बेल्ट का बकल गिरा दिखाई देगा। कुछ महीने पहले तक इसे साकेत कोर्ट परिसर में पार्क कर सुरक्षित रखा गया था। हालांकि बस मालिक के दो-दो बार आवेदन करने पर भी पुलिस ने इस बस को उसे नहीं सौंपा।
इसकी वजह ये है कि उस वक्त केस ताजा था और ये बस सड़क पर उतरने के बाद कानून-व्यवस्था में अवरोध पैदा कर सकती थी। इस बस को पुलिस ने वारदात के अगले दिन यानी 17 दिसंबर को दिल्ली के संत रविदास कैंप से बरामद किया था, जहां इस केस के 6 में से 4 दोषी रहते थे। यह बस केस में पर्याप्त फॉरेंसिक सबूत जुटाने का माध्यम थी।
इस बस में कोई प्रवेश न कर सके, यहां से सामान न चुरा सके और इसका तोड़-फोड़ या जला न सके, इसके लिए पुलिस ने सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए। यह वही जगह थी जहां सड़क के किनारे स्टेडियम के पास खड़ी इस बस की जांच फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने की और बाद में इन्हीं सबूतों से 6 लोग दोषी सिद्ध हुए। इन बीते 6 सालों में यह बस साकेत कोर्ट में पार्क रही और बाद में वसंत विहार पुलिस स्टेशन में। इस बस की रखवाली पुलिस टीम द्वारा बीते अप्रैल तक की जाती रही। क्योंकि अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि थाने अपने प्रांगण में पड़े सभी पुराने वाहनों को साफ कर दें और कैंपस साफ-सुथरा रखें। बीते अप्रैल में इस बस ने पूरे 6 साल बाद फिर चली और वही रास्ता अपनाया जो उस काली रात(16 दिसंबर 2012) को लिया था। हालांकि इस बार यह बस क्रेन के जरिए इन रास्तों से गुजरी और चुपचाप पश्चिम दिल्ली में वहां पहुंची जहां आज भी वो पार्क है। यह एक डंप यार्ड में पार्क है।