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फांसी के कुछ घंटे पहले इस प्रक्रिया से गुजरेंगे निर्भया के दोषी, फिर पूछी जाएगी अंतिम इच्छा

Tue, 07 Jan 2020 06:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 07 Jan 2020 06:20 PM IST
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Nirbhaya Case read full process of hanging of convicts why all done in silence
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया

सात साल का इंतजार खत्म होने को है। 22 जनवरी को निर्भया के दोषियों को सुबह सात बजे फांसी होगी। 16 दिसंबर 2012 के दिन पैरामेडिकल की एक छात्रा से जिस तरह छह दरिंदों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया उसका खयाल भी रूह कंपा देने वाला है। निर्भया के दोषियों को सुबह 7 बजे फांसी देना तय किया गया है। जानिए क्या होती है फांसी की पूरी प्रक्रिया और क्यों मौन रहकर दी जाती है फांसी....


 

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Nirbhaya Case read full process of hanging of convicts why all done in silence
निर्भया के चारों दोषी - फोटो : Social Media

सुबह की खामोशी में निर्भया के दोषियों को फांसी दी जाएगी। जेल मैनुअल के मुताबिक सुबह सूर्योदय के बाद ही फांसी देने का रिवाज है। आमतौर पर गर्मियों में सुबह छह बजे और सर्दियों में सात बजे फांसी दी जाती है। निर्भया के दोषियों को भी सुबह सात बजे ही फांसी होनी है। फांसी घर लाने से पहले दोषी को सुबह पांच बजे ही नहलाया जाता है। उसके बाद उसे नए कपड़े पहनाए जाते हैं। फिर उसे चाय पीने के लिए दिया जाता है। साथ ही उनसे नाश्ता के बारे में पूछा जाता है। अगर कोई नाश्ता करना चाहता है तो उसे नाश्ता दिया जाता है। 

Nirbhaya Case read full process of hanging of convicts why all done in silence
- फोटो : सोशल मीडिया

उसके बाद मजिस्ट्रेट दोषी से उनकी आखिरी इच्छा के बारे में पूछते हैं। उसके बाद उसे काला कपड़ा पहनाकर उसके हाथ को पीछे से बांध कर फांसी घर लाया जाता है। यहां पहुंचने के बाद उसके चेहरे को भी ढंक दिया जाता है। यह सब काम जल्लाद करता है। फांसी देते वक्त कोई आवाज न हो इसके लिए पूरे बंदोबस्त किए जाते हैं। जब फांसी देने का वक्त आता है तो उसके लिए इशारे के तौर पर रुमाल को गिराया जाता है और जल्लाद लीवर खींचता है। 

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Nirbhaya Case read full process of hanging of convicts why all done in silence
- फोटो : Social Media

इतने लोगों के सामने दी जाती है फांसी 
फांसी देने के समय फांसी घर में एकदम खामोशी होती है। जेल मैन्यूअल के अनुसार इस दौरान एक डॉक्टर, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, जेलर, डिप्टी जेलर और करीब 12 पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं। यहां सारी कार्रवाई इशारों में होती है। ब्लैक वारंट में तय समय पर दोषी को वहां लाकर जल्लाद उसके गर्दन में फंदा डाल देता है।  

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Nirbhaya Case read full process of hanging of convicts why all done in silence
- फोटो : सोशल मीडिया

पहले रुमाल गिरेगा फिर लीवर खिंचेगा
जेलर के रूमाल गिराकर इशारा करने पर जल्लाद या फिर जेल का कर्मचारी लीवर को खींच देता है। लीवर खींचते ही तख्त खुल जाता है और फंदे पर लटका दोषी नीचे चला जाता है। कुछ देर बाद डॉक्टर वहां पहुंचकर उसकी जांच करता है। धड़कन बंद होने की पुष्टि होने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। उसके बाद उसे फंदे से नीचे उतार लिया जाता है। इस दौरान जेल में कोई काम नहीं होता है। फांसी लगने के बाद ही जेल के दरवाजे को खोला जाता है।

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