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Nirbhaya Case: कोर्ट से दोषियों को एक और बड़ा झटका, ये मौका भी हाथ से छूटा

Sat, 11 Jan 2020 08:27 AM IST
शाहरुख खान ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 11 Jan 2020 08:27 AM IST
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Nirbhaya case Patiala House Court rejects NGO petition
निर्भया केस - फोटो : अमर उजाला
पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को अंगदान के लिए मनाने की अनुमति मांगने वाली एनजीओ राको की याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया है। एनजीओ की ओर से यह याचिका 7 जनवरी को तब दायर की गई थी, जब अदालत ने दोषियों को फांसी देने की तारीख और समय तय किया था।
Nirbhaya case Patiala House Court rejects NGO petition
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने इस अर्जी पर सरकारी वकील को जिरह की मोहलत देते हुए सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की थी। एनजीओ राको की अर्जी पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता शिवम शर्मा ने कहा कि विशेषज्ञों के समूह को दोषियों से मिलने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि उन्हें अंगदान के लिए तैयार किया जा सके।
 
Nirbhaya case Patiala House Court rejects NGO petition
इसी बस में हुई थी दरिंदगी - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के मुनीरका में 16 दिसंबर 2012 की रात 6 लोगों ने एक बस में बिठाकर निर्भया के साथ दरिंदगी की थी। वारदात के एक आरोपी ने गिरफ्तार होने के कुछ समय बाद ही खुदकुशी कर ली थी। एक आरोपी नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह में सजा काटने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया था। पटियाला हाउस अदालत ने पवन, विनय, अक्षय और मुकेश को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी देने आदेश दिया था।
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Nirbhaya case Patiala House Court rejects NGO petition
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया
तिहाड़ की जेल नंबर-3 में निर्भया के दोषियों को फांसी देने की तैयारी जारी है। दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी के फंदे पर लटकाया जाना है। हालांकि क्यूरेटिव याचिका और राष्ट्रपति से दया याचिका में कुछ समय लगता है तो फांसी की तारीख आगे बढ़ सकती है। 
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Nirbhaya case Patiala House Court rejects NGO petition
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
विनय ने याचिका में कहा कि कोर्ट ने उसके नाबालिग होने को गलत तरह से खारिज किया। साथ ही फैसला देते समय उसकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति, बीमार माता-पिता सहित परिवार में निर्भर लोगों की संख्या, जेल में अच्छे व्यवहार और सुधार की संभावना पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे न्याय का उल्लंघन होता है। 
 
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