निक्की यादव की हत्या मामले ने कंझावला कांड की याद ताजा कर दी है। जिस तरह आरोपी अंजलि को 13 किलोमीटर तक घसीटते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी, उसी तरह आरोपी साहिल निक्की के शव को कार में डालकर 40 किलोमीटर दूर अपने गांव मित्राऊ तक ले गया। पूरे रास्ते में कहीं भी उसकी जांच नहीं हुई।
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निक्की यादव
- फोटो : अमर उजाला
अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि निक्की को जब नौ फरवरी की रात को पता लगा कि साहिल की सगाई हो गई है तो वह उसे फोन करने लगी। इसके बाद दोनों रात एक बजे मिले। दोनों गोवा भागना चाहते थे। गोवा के लिए निक्की की फ्लाइट की टिकट तो हो गई थी, लेकिन साहिल को टिकट नहीं मिली थी। ऐसे में दोनों ने उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश जाने की योजना बनाई।
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निक्की यादव व साहिल गहलोत
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दोनों कार से आनंद विहार बस अड्डे पहुंच गए, लेकिन यहां पर पता चला कि उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश की बसें आईएसबीटी, कश्मीरी गेट से जाती हैं। इसके बाद दोनों कश्मीरी गेट पहुंच गए। इतने में साहिल के परिजनों के फोन आने लग गए। परिजन तुरंत घर आने के लिए साहिल पर दवाब बनाने लगे। साहिल घर जाने लगा तो निक्की उससे झगड़ा करने लगी। निक्की ने साहिल से एक साथ खुदकुशी करने की बात कही, लेकिन साहिल इसके लिए तैयार नहीं हुआ। जब झगड़ा बढ़ने लगा तो सुबह करीब चार बजे साहिल ने आईएसबीटी पर कार में डाटा केबल से निक्की की गला घोंटकर हत्या कर दी।
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इसी ढाबे में रखा था निक्की का शव
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वह शव को कार में ही मित्राऊ गांव ले गया। रास्ते में पुलिस की कहीं भी आरोपी की कार पर नजर नहीं पड़ी। साहिल ने शादी के बाद निक्की के शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी। पुलिस को आशंका है कि वह श्रद्धा की तरह ही शव को ठिकाने लगाता।
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साहिल गहलोत
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शादी के दौरान नहीं हुआ पछतावा
साहिल ने पूछताछ में बताया कि निक्की की हत्या करने के बाद उसे ज्यादा पछतावा नहीं हुआ। वह परिजन व निक्की दोनों के दबाव में था। हालांकि, 10 फरवरी की रात फेरों के समय उसे निक्की की याद आई थी। हत्या करने के बाद उसने ढाबे पर जाकर शव को नहीं देखा था।