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तौसीफ ने तो निकिता को मार डाला, लेकिन क्या वो 'हत्यारे' नहीं जिन्होंने सबकुछ देखा और नजरें झुका कर चले गए?

Wed, 28 Oct 2020 07:29 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 28 Oct 2020 07:29 PM IST
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Nikita murder case Ballabhgarh people watched whole scene when Tauseef killed her but dont take action
निकिता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
फरीदाबाद में सोमवार को निकिता के साथ हुई दिल दहला देने वाली घटना को लेकर लोगों में आक्रोश जरूर नजर आ रहा है। यह गुस्सा कोई नया नहीं है। हर बार जब कोई बेटी ऐसे राक्षसों की बली चढ़ जाती है तो लोगों का खून उबलता है, इंसाफ की मांग उठती है, आवाजें बुलंद होती हैं, लेकिन विडंबना है कि यह सब महज ढोंग भर है। 



 
Nikita murder case Ballabhgarh people watched whole scene when Tauseef killed her but dont take action
क्या इन्हें नहीं सुनाई दी होंगी निकिता की चीखें - फोटो : अमर उजाला
वाकई अगर बेटियों की रक्षा को लेकर हमारे समाज के लोग सजग होते तो किसी तौसीफ की हिम्मत न होती कि सड़क किनारे कार खड़ी करके पहले निकिता के साथ जबरदस्ती करे और फिर उसे गोली मारकर वहां से चला जाए। आज हम आपको तस्वीरों के माध्यम से दिखा रहे हैं निकिता की हत्या के बाद चीख-चीखकर इंसाफ और सुरक्षा की दुहाई देने वाले समाज की सच्चाई।

 
Nikita murder case Ballabhgarh people watched whole scene when Tauseef killed her but dont take action
क्या इन्होंने भी नहीं देखा निकिता के साथ वारदात होते हुए - फोटो : अमर उजाला
निकिता की हत्या तब की गई जब वह कॉलेज से परीक्षा देकर लौट रही थी। इस बीच दो युवक कार से आए। उनमें से एक ने छात्रा को कार में जबरदस्ती बैठाने की कोशिश की। वह छात्रा को हर कोशिश कर पीछे की सीट पर बैठाने का प्रयास करता रहा। छात्रा भी पूरी ताकत से उसका मुकाबला करती रही। तौसीफ ने तो जुर्म को अंजाम देने का दुस्साहस किया, लेकिन इस जुर्म को होते देख जिन लोगों ने आवाज उठाने के बजाय नजरें नीचे कर लीं, क्या वो निकिता के गुनहगार नहीं हैं?


 
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Nikita murder case Ballabhgarh people watched whole scene when Tauseef killed her but dont take action
क्या इनकी भी नजर नहीं गई होगी तौसीफ पर? - फोटो : अमर उजाला
बीच-बीच में छात्रा की सहेली युवक को रोकती नजर आई। जब युवक ने देखा कि छात्रा आपे से बाहर हो रही है और किसी तरह वह उसे कार में नहीं बैठा पा रहा तो उसने अपनी बंदूक निकाल ली। उसने पहले तो बंदूक से छात्रा को डराया, फिर देखते ही देखते गोली मार दी। यह सब छात्रा के कॉलेज के सामने ही हुआ। ऐसा नहीं था कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तौसीफ की हरकत पर किसी की नजर नहीं पड़ी। आने-जाने वाले लोगों ने सबकुछ देखा, लेकिन चुप रहना और नजरअंदाज करना बेहतर समझा। 

 
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Nikita murder case Ballabhgarh people watched whole scene when Tauseef killed her but dont take action
क्या ये नहीं रोक सकते थे तौसीफ को? - फोटो : अमर उजाला
अब जब मामला सुर्खियों में आ गया है तो लंबी-लंबी बहसें हो रही हैं। निकिता को इंसाफ और देश की बेटियों को सुरक्षा देने की बातें कही जा रहीं हैं। यह आवाज अगर उस समय उठाई गई होती जब तौसीफ निकिता को जबरदस्ती कार में बिठाने की कोशिश कर रहा था, तो क्या आज निकिता की जान नहीं बच गई होती? ऐसे समय पर आवाज उठाने की जिम्मेदारी किसकी है?

 
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