ये ऐसे मां-बाप हैं जिनके पास घर का खर्च चलाने के पैसे भी नहीं हैं लेकिन ये अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। दिल्ली में यमुना के किनारे रहने वाले चिल्ला खादर इलाके के दो दर्जन से ज्यादा परिवारों के बच्चों का स्कूल में एडमिशन नहीं हो पा रहा है।
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ऐसे ही एक परिवार की गृहणी नन्हीं ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठी भेजी है। नन्हीं ने इसमें लिखा है कि मैंने 1000 रूपये बचाए हैं और इसे मैं आपको दे दूंगी। मैं आपसे भीख मांगती हूं, कृपया आप मेरी बेटी का दाखिला करा दीजिए।
नन्हीं की तरह इस इलाके में रहने वाले अन्य परिजनों ने भी केजरीवाल को खुला पत्र लिखकर अपने बच्चों के सरकारी स्कूल में एडमिसन के लिए गुहार लगाई है।
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भारतीय संविधान में 2009 में हुए संशोधन के बाद जोड़े गए अनुच्छेद 21-A में प्रावधान किया गया है कि 6 से 14 साल के बच्चों को अपनी मर्जी से शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन जब हम अपने बच्चों का एडमिशन कराने सरकारी स्कूल में गए तो उन्होने आधार कार्ड न होने के कारण एडमिशन करने से मना कर दिया।
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अपनी बेटी के एडमिशन न होने से परेशान नन्हीं ने केजरीवाल को लिखे पत्र में बताया है कि मेरी बेटी पढ़ने में बहुत अच्छी है। जब मैं सब्जी बेचती हूं तो वो हिसाब लगाने में मेरी मदद करती है और उसकी गणित भी बहुत अच्छी है।