दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड का जो भयंकर मंजर वहां मौजूद लोगों ने देखा, उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। अवैध फैक्ट्रियों के चक्कर में उस दिन कुल 43 लोगों की दम घुटने या झुलसने के कारण मौत हो गई। इस एक हादसे ने जाने कितने घरों को तबाह कर दिया, कितनी मांगें उजाड़ दीं, कितनी मांओं की कोख सूनी हो गई, कितनों के भाई और दोस्त बिछड़ गए...। हादसे से प्रभावित लोगों की जिंदगी में कैसे एक पल मे ही सबकुछ बदल गया यह जानकर आप भी रो पड़ेंगे। आगे पढ़ें उस एक हादसे के साथ हुई तमाम मार्मिक घटनों के बारे में-
अनाज मंडी हादसा: कितनी मांगें उजाड़ दीं, कितनी कोख सूनी हो गई...हर कहानी पढ़कर भर जाएंगी आंखें
भाइयों के पास रहकर पढ़ाई कर रहे आदिल की भी गई जान
फैक्टरी में काम करने वाले दो भाइयों मो. परवेज और मो. गुरतेज के साथ रहकर पढ़ रहा 12 वर्षीय आदिल भी हादसे का शिकार बन गया। दोनों भाई उसे साथ रखकर पढ़ा रहे थे। हादसे में दोनों घायल हुए हैं। दरभंगा के बिसनपुरा निवासी 12 वर्षीय आदिल हादसे के समय नींद में था। इसीलिए वह जान गंवा बैठा। आदिल के बहनोई 28 वर्षीय अखलाक की भी इस अग्निकांड में मौत हुई। तीन बेटियों और 10 महीने के बेटे के पिता अखलाक की मौत से परिवार के सामने रोजी-रोटी तक का संकट खड़ा हो गया है।
...ट्रेन से पहले ही छूट गई जिंदगी की गाड़ी
जिस वक्त फैक्ट्री में आग लगी उसके कुछ घंटे बाद की ट्रेन से 20 कामगार दरभंगा और समस्तीपुर के लिए रवाना होने वाले थे। उनकी बुकिंग भी हो चुकी थी। रात के वक्त वे देर से सोए थे, जिसके कारण अधिकतर कामगारों की नींद नहीं खुली। सुबह आग की लपटों को देखकर जबतक उनकी नींद खुली तब तक काफी देर चुकी थी। इस दर्दनाक अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां चंद मिनटों में छीन लीं। इरफान ने बताया कि ट्रेन में 20 लोगों ने टिकट की बुकिंग करवाई थी, जिनमें छह की वेटिंग लिस्ट में थीं। इस अग्निकांड में अधिकतर की मौत हो गई है, अगर कुछ बचे हैं तो अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जिनके परिजन उनकी तलाश में जुटे हैं।
महज पांच मिनट में झुलस गए सारे दोस्त, देखता रह गया लाडले
फैक्ट्री में ही काम करने वाले मोहम्मद लाडले ने बताया कि वह फैक्टरी की तीसरी मंजिल पर अपने कमरे में सो रहा थे। सुबह करीब पांच बजे, उनके साथ की ही एक कामगार वॉशरूम से लौटा तो बताया कि हर तरफ धुआं निकल रहा है। आग की लपटें दूसरी मंजिल से उठ रही थीं। आग को देखकर मो. लाडले दौड़कर भागा लेकिन उसके साथ कमरे में रहने वाले कुछ लोग आग की चपेट में आ गए। हादसे में लाडले का मोबाइल फोन भी वहीं छूट गया था जो खाक हो गया। महज पांच मिनट के अंदर आग की लपटें इतनी विकराल हो गई कि उसकी चपेट में लाडले के कई साथी आ गए।
मोहम्मद करीम ने बताया कि वे बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी हैं। उनके गांव के ही बबलू, राजू और तौफीक की मौत हो चुकी है। रविवार शाम करीब 5 बजे वे अपने साथियों और दुलारे के साथ मोर्चरी पर ही थे। सादे कपड़ों में कुछ लोग आए और कहा कि वे सदर पुलिस थाने से हैं और कुछ बात करना चाहते हैं। धीरे-धीरे बात करते हुए वे दुलारे को आगे तक ले गए और फिर जीप में बैठाकर ले गए। साथी पीछे दौड़े तो पुलिसवालों ने कहा कि वे उसे छोड़ देंगे। सोमवार शाम तक भी दुलारे का अता-पता नहीं है। वे मोर्चरी के आगे बेबस खड़े हैं। तौफीक और बबलू का पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन वे साथ ही राजू का शव भी ले जाना चाहते हैं। मोर्चरी में पुलिस कह रही है कि जब तक राजू के परिवार से कोई नहीं आएगा, तब तक पोस्टमार्टम नहीं होगा। राजू के घर में बुजुर्ग मां-बाप हैं। उन्हें इतनी जल्दी दिल्ली बुलाना भी संभव नहीं है।