किताबों की दुनिया से राजनीति के सबक तक, कैसा रहा 'पूर्व' कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी का सफर
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महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले नेताओं को पार्टी में तरजीह देने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस नेता और प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राहुल गांधी को भिजवा दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट के बायो से भी कांग्रेस प्रवक्ता वाली लाइन हटा ली है। जानिए कौन हैं प्रियंका चतुर्वेदी और कैसा रहा है उनका राजनीतिक सफर...
19 नवंबर 1979 को मुंबई में जन्मी प्रियंका चतुर्वेदी के परिवार का ताल्लुक उत्तर प्रदेश से है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई, जुहू के सेंट जोसफ हाई स्कूल से हुई है और उन्होंने मुंबई के नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से कॉमर्स में स्नातक किया है। एक बढ़िया पाठक होने के साथ ही वह एक बेहतरीन ब्लॉग चलाती हैं। उनका ब्लॉग किताबों पर रिव्यू लिखने वाले भारत के टॉप टेन ब्लॉग है।
प्रियंका ने अपने करियर की शुरुआत मीडिया पीआर और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी एमपॉवर कंसल्टेंट्स से बतौर डायरेक्टर की थी। वह प्रयास चैरिटेबल ट्रस्ट की ट्रस्टी हैं जो दो स्कूल चलाता है और यहां 200 से ज्यादा गरीब बच्चों की शिक्षा व्यवस्था देखी जाती है।
प्रियंका के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2010 में हुई जब उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की। 2012 में उन्हें उत्तर-पश्चिमी मुंबई के भारतीय युवा कांग्रेस का जनरल सेक्रेटरी का पदभार सौंपा गया।
2010 में प्रियंका आईएसबी की 10,000 महिला उद्यमियों के लिए सर्टिफिकेट प्रोग्राम में प्रतिभागी के तौर पर शामिल थीं। यह गोल्डमैन सैक्स फाउंडेशन(Goldman Sachs Foundation) द्वारा चलाया जा रहा एक प्रोग्राम था।
प्रियंका चतुर्वेदी सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। वह ट्विटर पर कांग्रेस की नीतियों का बचाव करने के लिए जानी जाती हैं। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने 2013 में उन्हें अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। प्रवक्ता के तौर पर प्रियंका अक्सर ही बड़े-बड़े टीवी चैनलों की डिबेट में कांग्रेस की तरफ से बोलती देखी गई हैं।
यही नहीं प्रियंका कांग्रेस में रणदीप सुरजेवाला द्वारा नेतृत्व किए जाने वाले संचार विभाग की सदस्य भी रही हैं। वह भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचक हैं। 2015 में यूके हाईकमिशन और कॉमनवेल्थ पारलियामेंट्री एसोसिएशन लंदन द्वारा चुने गए डेलिगेशन में प्रियंका भी शामिल थीं। वहां जाकर प्रियंका ने लंदन के लोकतंत्र का अध्ययन किया। प्रियंका 2016 में टॉप 10 भारतीय महिला राजनेताओं की लिस्ट में भी शुमार थीं।
क्या है पूरा मामला जिसकी वजह से प्रियंका ने दिया इस्तीफा
कांग्रेस नेता और प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले नेताओं को पार्टी में तरजीह देने का आरोप लगाया था। प्रियंका ने लिखा कि जो लोग मेहनत कर अपनी जगह बना रहे हैं, उनके बदले गलत लोगों को तवज्जो मिल रही है।
प्रियंका ने ट्वीट किया, "काफी दुखी हूं कि अपना खून-पसीना बहाने वालों से ज्यादा गुंडों को कांग्रेस में तरजीह मिल रही है। पार्टी के लिए मैंने गालियां और पत्थर खाए हैं, लेकिन उसके बावजूद पार्टी में रहने वाले नेताओं ने ही मुझे धमकियां दीं। जो लोग धमकियां दे रहे थे, वह बच गए हैं। उनका बिना किसी कार्रवाई के बच जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
Deeply saddened that lumpen goons get prefence in @incindia over those who have given their sweat&blood. Having faced brickbats&abuse across board for the party but yet those who threatened me within the party getting away with not even a rap on their knuckles is unfortunate. https://t.co/CrVo1NAvz2
— Priyanka Chaturvedi (@priyankac19) April 17, 2019
इस ट्वीट के साथ एक चिट्ठी भी जुड़ी हुई है जिसे विजय लक्ष्मी के ट्विटर हैंडल से जारी किया गया था। दरअसल मामला मथुरा की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है जिसमें प्रियंका ने राफेल मुद्दे पर भाजपा को घेरा था।
आरोप है कि कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनके साथ बदसलूकी की। इसके बाद कुछ पर कार्रवाई भी हुई थी। चिट्ठी में अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात की गई। लेकिन ये भी लिखा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कहने पर ये कार्रवाई रद्द कर दी गई है।