सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए दो तेंदुए, भय में जी रहे लोग
ग्रेटर नोएडा के एनटीपीसी क्षेत्र में तेंदुए दिखाए देने से ग्रामीणों में भय है। वन विभाग ने दो पिंजरे लगाकर तेंदुए को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए। तेंदुए पकड़ा गया तो उसे हस्तिनापुर सेंचुरी भेजा जाएगा। डीएफओ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि 7-8 माह से एनटीपीसी और आसपास के गांव के लोग शिकायत कर रहे हैं कि वहां तेंदुए हैं। वन विभाग की टीम ने पूर्व में सीआईएसएफ के जवानों के साथ मिलकर वन क्षेत्र को छाना था मगर तेंदुए दिखाई नहीं दिया। (सभी फोटो:अमर उजाला ब्यूरो/ग्रेटर नोएडा)
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इसके बाद तेंदुए को पकड़ने के लिए हस्तिनापुर और हापुड़ से पिंजरा उधार मंगाया गया था। कई माह बाद पिंजरा वापस भेजना पड़ा। विभाग से अनुमति लेकर दो पिंजरे और तीन से चार कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर एनटीपीसी क्षेत्र में रखने पर विचार हुआ था। इस पर करीब ढाई लाख रुपये का खर्चा आने था। विभाग ने यह मांग पूरी कर दी। अब तेंदुए को पकड़ने के लिए दो पिंजरे और कर्मचारी लगा दिए हैं।
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डीएफओ ने बताया कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से अनुमति मांगी कि तेंदुए को यदि पकड़ लिया जाता है तो इसे कहां भेजा जाए। मंत्रालय ने तेंदुए को सुरक्षित रखने के लिए हस्तिनापुर सेंचुरी को उचित बताया है। तेंदुए ने ग्रामीणों को नुकसान नहीं पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि दो तेंदुए एनटीपीसी जंगल में हैं लेकिन सबसे ज्यादा सियार, भेड़िया और लकड़बग्घा जैसे कुछ जंगली जानवर है जो तेंदुए की तरह दिखते हैं। इससे आसपास क्षेत्र में भय है।
सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए दो तेंदुए, भय में जी रहे लोग
सीसीटीवी कैमरे में दिखाई दिए दो तेंदुएः डीएफओ ने बताया कि कई माह से तेंदुए को लेकर गहमागहमी चल रही थी लेकिन मिला कुछ नहीं। विभाग और एनटीपीसी की ओर से वन में नाइट विजन कैमरे लगवाए गए हैं। कई बार दो तेंदुए देखे गए थे।
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एनटीपीसी को राख और कोयला ठिकाने लगाने के लिए काफी जमीन चाहिए होती है। मगर अभी पूरी जमीन का एक चौथाई भाग ही एनटीपीसी अपने काम में ले रही है। इसलिए उस क्षेत्र पर वन विभाग और एनटीपीसी ने पौधरोपण करके उसे वन में तब्दील कर दिया है।