दिल्ली में कई राजाओं और बादशाहों का शासन रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ दिनों पहले तक यहां लखनऊ का एक नवाब रहता था। आप शायद ही जानते हों क्योंकि खुद दिल्लीवाले भी इनसे अनजान हैं। लेकिन ये कोई ऐसे वैसे नवाज नहीं बल्कि खुद को अवध का आखिरी नवाब बताते थे। उनकी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा कंगाली में बीता। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी मौत की खबर भी किसी को नहीं थी। 2 नवंबर को उनकी लाश मालचा महल में मिली और 5 नवंबर को बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित कब्रिस्तान में इन्हें दफना दिया गया।
...और कंगाल ही मर गया अवध का 'आखिरी नवाब', दिल्ली के मालचा महल में रहता था
क्या आप जानते हैं दिल्ली में मालचा महल है जहां रहते थे नवाब
अगर आप दिल्ली के चाणक्यपुरी से गुजरेंगे तो आपको मालचा महल दिख सकता है। हालांकि उसकी जर्जर हालत देखकर आपके लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल होगा कि इसमें कोई रह भी सकता है। उसी जर्जर महल में रहते थे अवध के आखिरी नवाब प्रिंस साइरस। यहां न कोई खिड़की थी, न बिजली न पानी। सिर्फ एक दरवाजा और एक गलियारा है जहां से बाहर की रौशनी और हवा अंदर आती है।
कैसे हुई ये हालत
1971 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने में प्रिवी पर्स (राजा-महाराजाओं को मिलने वाली पेंशन) खत्म हुआ तो कई राजा साधारण जिंदगी जीने को मजबूर हुए। प्रिंस साइरस उनसे अलग न थे। लेकिन प्रिंस की मां जो खुद को विलायत महल कहती थीं ने तय किया कि वह शाही तरीके से ही रहेंगी। जर्जर हो चुके महल जिसमें ना दरवाजा था, ना पानी और ना ही पानी पर विलायत महल वहीं रहीं। शाही रौब इतना कि कभी किसी हिंदी अखबार या टीवी को इंटरव्यू तक न दिया।
मालचा महल पहले था बिस्तदरी खंडहर
पहली बार 1970 में ये शाही परिवार सुर्खियों में आया था जब अली रजा(प्रिंस साइरस), उनकी बहन सकीना और उनकी मां बेगम वलीयत महल ने खुद को अवध के नवाब वाजिद अली शाह का सीधा उत्तराधिकारी बताया था। उस वक्त वलीयत महल ने ये दावा करते हुए दिल्ली रेलवे स्टेशन का फर्स्ट क्लास लाउंज कब्जा लिया था। उनके साथ उनके दो बच्चे, कुछ नौकर और कुत्ते थे। उस वक्त उन्होंने भारत सरकार से 1856 में नवाब वाजिद अली शाह से छीनी गई सारी संपत्ति का मुआवजा मांगा था।
तब 1977 में गृहमंत्रालय ने लखनऊ के अलीगंज में उनके लिए एक घर का इंतजाम किया था। लेकिन वलीयत महल ने लखनऊ जाने से इंकान कर दिया और दिल्ली में ही रहने का इंतजाम मांगा।