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सिर्फ फायदे ही नहीं बल्कि कई नुकसान भी हैं सैनेटरी पैड्स के, जरूर पढ़ें ये जानकारी
Sun, 11 Feb 2018 10:09 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:09 AM IST
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अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' शुक्रवार को रिलीज हो चुकी है। जबसे इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था, तब से लोगों के बीच सैनिटरी पैड को लेकर चर्चा शुरू हुई थी, जो अब भी जारी है। मालूम हो कि अगर सैनिटरी पैड का सही तरह इस्तेमाल न किया जाए, तो यह आपके सवास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकते हैं। चलिए जानते हैं इसके क्या हैं नुकसान-
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हर महिला मासिक चक्र से गुजरती है। पीरियड्स की अवधि हर महिला के लिए अलग-अलग हो मानी जाती है। इसमें ब्लीडिंग होना आम बात है। लेकिन कई महिलाएं हैवी फ्लो का सामना करती हैं। इस दौरान रक्त को सोखने के लिए सैनेटरी पैड का इस्तमाल किया जाता है और यह अलग-अलग साइज में आता है।
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डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक एक ही पैड लगाकार रखने से निचले हिस्से में पसीने और खून से नमी पैदा होती है। इससे आपको रैशेज और वैजाइनल इंफेक्शन का खतरा हो रहता है। कम फ्लो में 6 घंटे में पैड बदलना चाहिए और जिन महिलाओं को हैवी फ्लो होता है तो उन्हें बार-बार पैड बदलते रहना चाहिए। जो महिलाएं टैम्पोन का इस्तेमाल करती हैं उनको टैंपोन हर दो घंटे में बदल देना चाहिए क्योंकि लंबे समय तक टैम्पोन लगा रहने से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम(टीएसएस) हो सकता है। टीएसएस ऐसा सिंड्रोम है, जहां बैक्टेरिया शरीर के अंदर प्रवेश कर गंभीर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं।
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एक सर्वे के अनुसार, भारत में करीब 33.6 करोड़ लड़कियां और महिलाएं पीरियड्स से गुजरती हैं। इनमें से 12.1 करोड़ डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन (डीएसएन) का इस्तेमाल कर पाती हैं। इसका मतलब हर माह इस्तेमाल हुए करीब एक अरब से भी ज्यादा पैड फेंक दिए जाते हैं, जो कचरे के गड्ढों, सीवर या जल स्रोतों में जमा हो जाते हैं। तो जाहिर सी बात है कि इतनी बड़ी संख्या में जमा होना बड़े पैमाने पर पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होते हैं।
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- फोटो : Facebook
इसी सर्वे में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन में 90 फीसद प्लास्टिक होता है। इसमें डाइऑक्सिन, फुरन और पेस्टीसाइड जैसे कई केमिकल्स मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं।
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