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कोख में बेटियों को मारने के कलंक से दूर है जुनैद का गांव, 1000 लड़कों पर 1200 लड़कियां

Fri, 30 Jun 2017 09:28 AM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 30 Jun 2017 09:28 AM IST
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junaid village khandawali promote stigma beti bachao beti padhao
eid in junaid village - फोटो : अमर उजाला
22 जून को चलती ट्रेन में पीट-पीटकर और चाकुओ से गोदकर मारे गए जुनैद के कारण चर्चाओं में आया गांव ‘खंदावली’ बेटियों को कोख में मारने के कलंक से दूर है। गांव में एक हजार लड़कों पर 1200 से ज्यादा लड़कियां है। खुद जुनैद की मां सायरा बेटियों को कोख में मारने की बजाए उन्हें शिक्षित कर पैरों पर खड़ा करने की जोरदार हिमायती हैं। सायरा ने अपनी इकलौती बेटी राबिया को 10वीं कक्षा तक पढ़ाया ही नहीं, बल्कि उसे आलिया (शिक्षक) बनाकर पैरों पर खड़ा भी किया।
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junaid murder
‘बेटी नहीं होगी तो बहू कहां से आएगी’ जैसी स्थिति को प्रदेश के कई जिले व गांव अभी भी झेल रहे हैं। कई जिलों में युवाओं को दूसरे प्रदेशों से दुल्हन खरीद कर लानी पड़ती हैं। पलवल, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक सहित अन्य जिलों में बिहार, पश्चिम बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व राजस्थान से दुल्हनें लाई जाती रही हैं। 

 
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हालांकि, प्रदेश व केंद्र सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम से लगातार लिंगानुपात में अंतर आ रहा है। तीन वर्षों में अब प्रदेश में प्रति हजार पुरुषों पर 900 महिलाओं का आंकड़ा छू रहा है लेकिन इस सबसे अलग खंदावली गांव में लड़कियों की संख्या 1200 से ऊपर है। लोगों में लड़कियों को लेकर बेहद सम्मान है। यहां लड़कियों को पढ़ने की पूरी छूट है। 

 
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junaid murder - फोटो : अमर उजाला

खुद मृतक जुनैद की बड़ी बहन राबिया 10वीं पास है। वह सालाहेड़ी (नूंह) में बतौर आलिया (शिक्षक) महिलाओं को शिक्षित करने का काम करती हैं। लिंगानुपात सुधारने में पूर्व सरपंच नूर निशा का सबसे बड़ा हाथ बताया जाता है। उन्होंने सरपंच रहते हुए घर-घर बेटियों के प्रति भेदभाव न करने की अलख जगाई। 


 
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​हालांकि 2012 में जिला प्रशासन को लिंगानुपात का सर्टिफिकेट देने के बावजूद आज तक गांव को कोई अवार्ड नहीं मिला। जिसका खुद सरपंच निसार सरपंच निसार अहमद को मलाल है। वह कहते हैं कि मेरा गांव प्रधानमंत्री के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का आइकॉन बन सकता है लेकिन न तो इस तरफ कभी केंद्र सरकार की नजर पड़ी और न ही प्रदेश सरकार की। 
 
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