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जेएनयू विवाद में अब तक सबसे बड़ा खुलासा, 36 महीने जांच के बाद भी 36 के खिलाफ पुलिस को नहीं मिले सबूत

Tue, 15 Jan 2019 12:46 AM IST
shubham धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, दिल्ली
धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, दिल्ली Published by: shubham Updated Tue, 15 Jan 2019 12:46 AM IST
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JNU Sedition Case police No evidence found against 36 students after 36 months of investigation
जेएनयू - फोटो : ब्यूरो
जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी विवाद में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब तीन साल की जांच के बाद आरोप पत्र तो दाखिल कर दिया, लेकिन 36 ऐसे छात्र रहे, जिनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा सकी। इन संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्य न मिलना स्पेशल सेल की जांच पर सवाल खड़े करता है। दिल्ली पुलिस ने अपने आरोप पत्र में कहा कि ऐसे 36 लोग हैं, जिन पर संदेह है, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका। इसलिए इन लोगों संदिग्ध के तौर पर आरोपित किया गया है। इनमें जेएनयू की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद, अपराजिता, रामा नागा, आशुतोष कुमार, इशान व एक प्रोफेसर शामिल हैं।  
JNU Sedition Case police No evidence found against 36 students after 36 months of investigation
जेएनयू - फोटो : source
इस मामले की जांच स्पेशल सेल को तब सौंपी गई थी जब इस नारेबाजी के तार कश्मीर से जुड़े थे और सरकार व एजेंसियों को इसके पीछे कश्मीर के आतंकियों की साजिश का अंदेशा हुआ था। इसके बाद केस की जांच स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर उमेश बर्थवाल कर रहे थे और जांच की निगरानी एसीपी गोविंद शर्मा के साथ डीसीपी प्रमोद कुशवाहा व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के जिम्मे थी।

नारेबाजी से बिगड़ा था माहौल 

JNU Sedition Case police No evidence found against 36 students after 36 months of investigation
कन्हैया कुमार
देश विरोधी नारेबाजी के बाद जेएनयू कैंपस में छात्रों के बीच मुनमुटाव व गुटबाजी बढ़ी थी। इस घटना के बाद वामपंथी छात्रों को शक की निगाह से देखा जाने लगा था। मामले में शिकायत करने वाले एबीवीपी के सदस्यों की माने तो वामपंथी छात्र आतंकियों के पक्षधर हैं और इसलिए अफजल गुरु की फांसी के विरोध में हर साल कार्यक्रम करते थे। उनके मुताबिक उन्हें देश की संसद पर हमले के दोषी की फांसी की बरसी नहीं मनानी चाहिए थी। दूसरी ओर वामपंथी विचारधारा वाले छात्र व अध्यापक फांसी की सजा को गलत बताते रहे थे और इसका विरोध करते थे।  
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कोर्ट परिसर में छात्रों व पत्रकारों पर हुआ था हमला 

JNU Sedition Case police No evidence found against 36 students after 36 months of investigation
कन्हैया कुमार
पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया कुमार को 16 फरवरी 2016 को पेश किया जाना था। देश विरोधी नारों के विरोध में राजधानी के वकील लामबंद हो गए थे। सुनवाई शुरू होने से पहले ही वकीलों ने जेएनयू के छात्रों व अध्यापकों से मारपीट व धक्का-मुक्की शुरू कर दी थी। इन लोगों को पुलिस ने किसी तरह बचा कर कोर्ट से बाहर निकाला था। वकीलों ने वहां मौजूद पत्रकारों से भी मारपीट की थी।
 
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नारेबाजी के आठ माह बाद गायब हुआ था नजीब 

JNU Sedition Case police No evidence found against 36 students after 36 months of investigation
नजीब अहमद - फोटो : फाइल फोटो
नारेबाजी के बाद जेएनयू कैंपस का माहौल काफी खराब हुआ था। छात्रों के गुटों के बीच कहासुनी आम बात हो गई थी। नारेबाजी की घटना नौ फरवरी 2016 को हुई थी और इसके आठ महीने बाद पीएचडी का छात्र नजीब अहमद 15 अक्तूबर 2016 को गायब हो गया था। उसके गायब होने के पीछे एबीवीपी के नौ छात्रों का हाथ होने का आरोप लगा था। 
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