जिगिषा घोष मर्डर केस में मुख्य दोषी रवि कपूर की मानसिक हालत ठीक नहीं है। उसने मरने की इच्छा जाहिर की थी। उसकी सहन शक्ति बेहद कम है और उसका गुस्से पर भी काबू नहीं रहता। इन बातों का खुलासा उसके मनोचिकित्सीय रिपोर्ट से हुआ था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव के समक्ष दोषियों की सजा पर बहस करते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने मनोचिकित्सक की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा था कि उनके मुवक्किल की मानसिक हालत ठीक नहीं है और उसे गहन मनोचिकित्सीय जांच व इलाज की जरूरत है। वह असाध्य बीमारी से भी पीड़ित है। हालांकि आज कोर्ट ने सजा सुनाते हुए बचाव पक्ष की इन दलीलों को महत्व नहीं दिया और रवि कपूर को फांसी की सजा सुनाई है।
जिगिषा संग दरिंदगी करने वाले का जेल में हुआ ऐसा हाल की खुद ही मांगने लगा मौत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा था कि रवि के दोनों हाथों पर जलने के निशान हैं। उसने मॉस्किटो क्वाइल से अपने हाथ जला लिए थे। मनोचिकित्सक के पूछने पर उसने बताया कि उसे ऐसा करने का मन हुआ तो उसने कर लिया। मनोचिकित्सक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रवि कपूर कई बार खुद को नुकसान पहुंचा चुका है। जब वह आपे से बाहर होता है तो वह आगे पीछे नहीं सोच पाता। उसकी सहन शक्ति बेहद कमजोर है और उसका गुस्से पर भी काबू नहीं है।
रिपोर्ट का हवाला देते हुए दीपक शर्मा ने कहा था कि रवि कपूर ने अपने इंटरव्यू में मरने की इच्छा जाहिर की है। इन तथ्यों के मद्देनजर मनोचिकित्सक ने उसकी गहन जांच व इलाज की सिफारिश की है। बचाव पक्ष ने कहा कि रवि कपूर पर उसके माता पिता की जिम्मेदारी भी है। उसकी मां को हृदय रोग है और एक्सीडेंट में उसके पिता का पैर टूट चुका है। वो चलने फिरने में लाचार हैं। इन तथ्यों के मद्देनजर रवि को सजा देने में नरमी बरती जाए।
अभियोजन पक्ष ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा था कि रवि कपूर की मानसिक हालत आज खराब है लेकिन अपराध के समय वह बिल्कुल ठीक था। इसलिए उसे कड़ी सजा दी जानी चाहिये। मामले में अन्य दोषी अमित शुक्ला के अधिवक्ता अमित कुमार ने कहा कि उनका मुवक्किल सात साल से जेल में है और अब उसके सुधार की बात की जा रही है। लेकिन आज शायद अदालत को बचाव पक्ष की इन दलीलों में ज्यादा सच्चाई नहीं लगी और उसने रवि व अमित दोनों को फांसी की सजा दी और जिगिषा के साथ न्याय किया।
बचाव पक्ष की दलील थी कि जेल में बंद कैदियों के सुधार और जीवन की मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। उनके मुवक्किल पर जेल से रंगदारी रैकेट चलाने का आरोप है। वह जेल में बंद है और अगर इसके बाद भी रंगदारी रैकेट चला रहा है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह बड़ा सवाल है।