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दिल्ली का एक ऐसा थाना जहां बदमाशों से ज्यादा आते हैं छात्र-छात्राएं, मौजूद है पहली डिजिटल लाईब्रेरी

Fri, 13 Dec 2019 09:36 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 13 Dec 2019 09:36 PM IST
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Jamia Nagar police station has more students than miscreants
जामिया नगर पुलिस स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली पुलिस का एक ऐसा थाना ऐसा भी है जहां युवा शिकायत करने नहीं बल्कि पढ़ने आते हैं। जी हां यह है दक्षिण-पूर्व जिले का जामिया नगर थाना। यहां पर बदमाशों से ज्यादा छात्र-छात्राएं आते हैं। यह थाना अपराधियों को पकड़ने के साथ ही युवाओं का भविष्य भी संवार रहा है। 



दिल्ली पुलिस का यह एकलौता थाना है जिसमें पुलिस-पब्लिक डिजिटल लाईब्रेरी है। दिल्ली पुलिस शिखर एनजीओ के साथ मिलकर इस डिजिटल लाइब्रेरी को चला रही है। इस लाइब्रेरी में बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाली पुस्तकों के अलावा सभी तरह के अखबार उपलब्ध होते हैं। इस लाइब्रेरी को भारत की पहली डिजिटल लाइब्रेरी बताया जा रहा है। 
 

Jamia Nagar police station has more students than miscreants
जामिया नगर पुलिस स्टेशन - फोटो : अमर उजाला

इस लाइब्रेरी की स्थापना इलाके के लोगों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल के लिए की गई थी। एनजीओ निदेशक नदीम अख्तर ने बताया कि पुलिस व पब्लिक के बीच दूरी को कम करने के लिए जामिया नगर थाने में डिजीटल लाइब्रेरी की स्थापना 22 फरवरी, 2012 में की गई थी। दक्षिण-पूर्व जिले के तत्कालीन डीसीपी अजय चौधरी व तत्कालीन दक्षिण परिक्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक (अब पुलिस आयुक्त) ने जामिया नगर के लोगों के लिए लाइब्रेरी स्थापित करने की पहल की थी। इस लाइब्रेरी में 2000 से ज्यादा पुस्तकें हैं और 10 से ज्यादा लैपटॉप हैं। इनमें साहित्य, प्रतियोगिता, डिक्शनरी, व बच्चों के साथ से जुड़ी पुलिस पुस्तकें शामिल हैं। बच्चे लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई भी कर सकते हैं। छात्र यूपीएससी, एसएससी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। लाइब्रेरी सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खुलती है। 

Jamia Nagar police station has more students than miscreants
नदीम अख्तर - फोटो : अमर उजाला
इस लाइब्रेरी में पाठकों के लिए हर दिन हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी में 14 से ज्यादा समाचार पत्र उपलब्ध रहते हैं। इसका कोई सदस्यता शुल्क नहीं है। छात्र-छात्राएं घर किताब ले जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है। यहां नदीम अख्तर व थानाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बच्चों की क्लास लेते हैं। नदीम का कहना है कि सुरक्षा के लिए लाइब्रेरी में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। जल्द ही आरके पुरम व बदरपुर थाने में इस तरह की लाइब्रेरी खोली जा रही हैं। 

 
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Jamia Nagar police station has more students than miscreants
छात्र - फोटो : अमर उजाला

एक लाख से ज्यादा युवा आ चुके हैं
लाइब्रेरी की जब से स्थापना हुई तब से अब तक करीब एक लाख छात्र-छात्राएं यहां पढ़ाई करने आ चुके हैं। नदीम अख्तर ने बताया कि इलाके में इस तरह की कोई लाइब्रेरी नहीं है। वह लोगों से फंड लेकर इसे चला रहे हैं। हाल ही में लाइब्रेरी का नवीनीकरण करवाया गया है। लाइब्रेरी में 70 से ज्यादा बच्चे हर रोज आते हैं। 
 

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Jamia Nagar police station has more students than miscreants
छात्र - फोटो : अमर उजाला
छात्रों से बातचीत
1. यहां सभी तरह की सुविधाएं व पुस्तकें मिल जाती हैं। लाइब्रेरी चलाने वाले अख्तर सर से लाइब्रेरी में कोई किताब न होने की बात कहीं जाती है तो वह तुरंत मांगा देते हैं। वह पिछले आठ महीने से लाइब्रेरी में लगातार आ रहा और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है।
मो. अजहरूद्दीन, छात्र 

2. वह यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। इलाके में कोई और लाइब्रेरी नहीं है। इस कारण वह इस लाइब्रेरी में आता है। यहां सभी तरह के अखबार व पत्रिकाएं मिल जाती हैं। लाइब्रेरी का वातावरण बहुत शांत रहता है। शोर बिल्कुल नहीं होता है। इस कारण यहां पढ़ना अच्छा लगता है।  
-अफसर अली, छात्र 

3. शुरू में वह आया तो उसे झिझक हुई कि वह थाने जा रहा है। मगर अब बहुत अच्छा लगता है। वह लाइब्रेरी में चार महीने से लगातार आ रहा है। लाइब्रेरी में पढ़ने के अलावा वह पुस्तकें अपने घर ले जाता है। पुलिसकर्मियों से भी मुलाकात होती है। अब पुलिसकर्मी उसे दोस्त जैसे लगते हैं। 
-फैज अख्तर, छात्र

पुलिस व इलाके के लोगों में बेहतर तालमेल के लिए इस लाइब्रेरी को शुरू किया गया है। इस लाइब्रेरी में हर तबके का युवा पढ़ने आता है। स्थानीय लोग भी अखबार व पत्रिका पढ़ने आते हैं। इससे पुलिस व जनता के बीच तालमेल बढ़ रहा है।  
अनिल मित्तल, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त प्रवक्ता। 
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