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जेएनयू छात्रों और पुलिस के बीच यहां बिगड़ी थी बात, इंटेलिजेंस भी गुस्सा भांपने में रही नाकाम

Tue, 12 Nov 2019 12:52 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 12 Nov 2019 12:52 AM IST
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Intelligence of Delhi Police failed to capture anger of JNU students
जेएनयू में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में नए हॉस्टल नियमों को लेकर छात्र पिछले कई दिन से प्रदर्शन कर रहे थे और कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार से बात करना चाहते थे, लेकिन उनकी बात सुनने के लिए कोई नहीं आया। यह वजह रही कि विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ छात्रों का गुस्सा दिन ब दिन बढ़ता चला गया। 



 

Intelligence of Delhi Police failed to capture anger of JNU students
जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आशी घोष ने कहा कि कुलपति अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल हुए हैं। उनका काम छात्रों की समस्याओं को दूर करना भी होता है, लेकिन विरोध कर रहे छात्रों से एक बार भी संवाद नहीं किया। कुलपति, रजिस्ट्रार, प्रोक्टर, डीन ऑफ स्टूडेंट में से कोई आम छात्रों से जाकर मिलते और उनकी उलझन दूर करने की पहल करते तो एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत अन्य पदाधिकारी पांच घंटे तक एआईसीटीई मुख्यालय में बंधक न बनते। उधर, दिल्ली पुलिस का इंटेलीजेंस विभाग भी छात्रों के प्रदर्शन को भांपने में नाकाम रहा है। 

Intelligence of Delhi Police failed to capture anger of JNU students
जेएनयू छात्रों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

जेएनयू कैंपस में नौ अक्तूबर को नए हॉस्टल नियम का ड्रॉफ्ट विश्वविद्यालय वेबसाइट पर अपलोड होते ही विरोध शुरू हो गया था। इसी बीच 28 अक्तूबर को हॉस्टल ड्रॉफ्ट पर आयोजित बैठक के बाद छात्रों का विरोध और तेज हो गया। छात्र बार-बार कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार या विश्वविद्यालय प्रबंधन की टीम से इस मुद्दे पर बात करना चाहते थे पर कोई जवाब नहीं आया। इसी बीच कई प्रोवोस्ट से प्रेशर बनाकर छात्रों ने इस्तीफा भी ले लिया। 

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Intelligence of Delhi Police failed to capture anger of JNU students
jnu student protest - फोटो : पीटीआई

प्रो. वंदना गुप्ता को छुड़ाने सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस ने की मारपीट 
छात्रों ने कुलपति को सामने लाने के लिए एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट प्रो. वंदना गुप्ता को शुक्रवार सुबह उस समय बंधक बना लिया, जब वे स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्ट्डीज में क्लास लेने पहुंची थी। करीब 36 घंटे के बाद दिल्ली पुलिस सादे कपड़ों में क्लास रूम में पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मारपीट की और प्रो. गुप्ता को अस्पताल पहुंचाया। 

मारपीट की घटना से छात्रों में दिल्ली पुलिस के खिलाफ आक्रोश था। दो दिन तक रणनीति बनाने के बाद सोमवार को हंगामे व प्रदर्शन की रूपरेखा को अंजाम दिया। दिल्ली पुलिस शनिवार को आम छात्रों से क्लासरूम में मारपीट नहीं करती तो शायद ऐसा नहीं होता। 

वहीं, पुलिस यह भांपने में भी नाकाम रही कि यह गुस्सा या लड़ाई छात्रसंघ या वामपंथी संगठनों का नहीं, बल्कि आम छात्रों की थी। शनिवार व रविवार को छात्रों ने दीक्षांत समारोह में विजिटर के समक्ष अपनी मांग रखने का फैसला लिया। इसमें सभी आम छात्रों को सोशल मीडिया व मैसेज के माध्यम से जोड़ा गया। बाहर रहने वाले छात्र सीधे एआईसीटीई मुख्यालय पहुंचे और पुलिस को पता भी नहीं चला। 

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jnu student protest - फोटो : पीटीआई

कुलपति ने विजिटर के आदेश का भी किया उल्लंघन
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर यानी उपराष्ट्रपति ने 2017 में विजिटर कांफ्रेस में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रतिवर्ष दीक्षांत समारोह आयोजित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कुलपतियों को छात्रों की दिक्कतों का समाधान करने व उनसे निरंतर संवाद करने को कहा था। 

जेएनयू कुलपति ने विजिटर का आदेश माना होता तो नौ अक्तूबर से छात्रों में पनप रहा गुस्सा एआईसीटीई मुख्यालय के बाहर सड़कों पर यूं नहीं फूटता। 

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