फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail

जानिए क्या-क्या हुआ था उस दिन जब इंदिरा गांधी पर बरसाईं गईं थीं गोलियां

Thu, 31 Oct 2019 02:54 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 31 Oct 2019 02:54 PM IST
विज्ञापन
indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail
इंदिरा गांघी

भुवनेश्वर से इंदिरा गांधी की कई यादें जुड़ी हुई हैं और इनमें से अधिकतर यादें सुखद नहीं हैं। इसी शहर में उनके पिता जवाहरलाल नेहरू पहली बार गंभीर रूप से बीमार पड़े थे जिसकी वजह से मई 1964 में उनकी मौत हुई थी और इसी शहर में 1967 के चुनाव प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी पर एक पत्थर फेंका गया था, जिससे उनकी नाक की हड्डी टूट गई थी। यही वह शहर है जहां इंदिरा गांधी ने अपने जीवन का आखिरी चुनावी भाषण दिया था।

विज्ञापन


30 अक्तूबर 1984 की दोपहर इंदिरा गांधी ने जो चुनावी भाषण दिया, उसे हमेशा की तरह उनके सूचना सलाहकार एचवाई शारदा प्रसाद ने तैयार किया था। लेकिन अचानक उन्होंने तैयार आलेख से अलग होकर बोलना शुरू कर दिया। उनके बोलने का तेवर भी बदल गया।
विज्ञापन


इंदिरा गांधी बोलीं, 'मैं आज यहां हूं। कल शायद यहां न रहूं। मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं। मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करने में लगेगा।'
विज्ञापन
विज्ञापन


कभी-कभी नियति शब्दों में ढलकर आने वाले दिनों की तरफ इशारा करती है। भाषण के बाद जब वो राजभवन लौटीं तो राज्यपाल बिशंभरनाथ पांडे ने कहा कि आपने हिंसक मौत का जिक्र कर मुझे हिलाकर रख दिया। इंदिरा गांधी ने जवाब दिया कि वो ईमानदार और तथ्यपरक बात कह रही थीं।

रातभर सोईं नहीं

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ पाकिस्तानी राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो - फोटो : Bhutto.Org

उस रात इंदिरा जब दिल्ली वापस लौटीं तो काफी थक गई थीं। उस रात वो बहुत कम सो पाईं। सामने के कमरे में सो रहीं सोनिया गांधी जब सुबह चार बजे अपनी दमे की दवाई लेने के लिए उठकर बाथरूम गईं तो इंदिरा उस समय जाग रही थीं।

सोनिया गांधी अपनी किताब 'राजीव' में लिखती हैं कि इंदिरा भी उनके पीछे-पीछे बाथरूम में आ गईं और दवा खोजने में उनकी मदद करने लगीं। वो ये भी बोलीं कि अगर तुम्हारी तबीयत फिर बिगड़े तो मुझे आवाज दे देना। मैं जाग रही हूं।

हल्का नाश्ता
सुबह साढ़े सात बजे तक इंदिरा गांधी तैयार हो चुकी थीं। उस दिन उन्होंने केसरिया रंग की साड़ी पहनी थी जिसका बॉर्डर काला था। इस दिन उनका पहला अपॉएंटमेंट पीटर उस्तीनोव के साथ था जो इंदिरा गांधी पर एक डॉक्युमेंट्री बना रहे थे और एक दिन पहले उड़ीसा दौरे के दौरान भी उनको शूट कर रहे थे। 

दोपहर में उन्हें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जेम्स कैलेघन और मिजोरम के एक नेता से मिलना था। शाम को वो ब्रिटेन की राजकुमारी ऐन को भोज देने वाली थीं। उस दिन नाश्ते में उन्होंने दो टोस्ट, सीरियल्स, संतरे का ताजा जूस और अंडे लिए। नाश्ते के बाद जब मेकअप-मेन उनके चेहरे पर पाउडर और ब्लशर लगा रहे थे तो उनके डॉक्टर केपी माथुर वहां पहुंच गए। वो रोज इसी समय उन्हें देखने पहुंचते थे।

उन्होंने डॉक्टर माथुर को भी अंदर बुला लिया और दोनों बातें करने लगे। उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन के जरूरत से ज्यादा मेकअप करने और उनके 80 साल की उम्र में काले बाल होने के बारे में मजाक भी किया। 

अचानक फायरिंग

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail
इंदिरा गांधी के अंतिम दर्शन करने उमड़े लोग

नौ बजकर 10 मिनट पर जब इंदिरा गांधी बाहर आईं तो खुशनुमा धूप खिली हुई थी। उन्हें धूप से बचाने के लिए सिपाही नारायण सिंह काला छाता लिए हुए उनके बगल में चल रहे थे। उनसे कुछ कदम पीछे थे आरके धवन और उनके भी पीछे थे इंदिरा गांधी के निजी सेवक नाथू राम। 

सबसे पीछे थे उनके निजी सुरक्षा अधिकारी सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल। इस बीच एक कर्मचारी एक टी-सेट लेकर सामने से गुजरा जिसमें उस्तीनोव को चाय सर्व की जानी थी। इंदिरा ने उसे बुलाकर कहा कि उस्तीनोव के लिए दूसरा टी-सेट निकाला जाए। जब इंदिरा गांधी एक अकबर रोड को जोड़ने वाले विकेट गेट पर पहुंची तो वो धवन से बात कर रही थीं।

धवन उन्हें बता रहे थे कि उन्होंने उनके निर्देशानुसार, यमन के दौरे पर गए राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को संदेश भिजवा दिया है कि वो सात बजे तक दिल्ली लैंड कर जाएं ताकि उनको पालम हवाई अड्डे पर रिसीव करने के बाद इंदिरा, ब्रिटेन की राजकुमारी एन को दिए जाने वाले भोज में शामिल हो सकें। अचानक वहां तैनात सुरक्षाकर्मी बेअंत सिंह ने अपनी रिवॉल्वर निकालकर इंदिरा गांधी पर फायर किया। गोली उनके पेट में लगी।

इंदिरा ने चेहरा बचाने के लिए अपना दाहिना हाथ उठाया लेकिन तभी बेअंत ने बिल्कुल प्वॉइंट ब्लैंक रेंज से दो और फायर किए। ये गोलियां उनकी बगल, सीने और कमर में घुस गईं। 

गोली चलाओ

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail

वहां से पांच फुट की दूरी पर सतवंत सिंह अपनी टॉमसन ऑटोमैटिक कारबाइन के साथ खड़ा था। इंदिरा गांधी को गिरते हुए देख वो इतनी दहशत में आ गया कि अपनी जगह से हिला तक नहीं। तभी बेअंत ने उसे चिल्लाकर कहा गोली चलाओ। सतवंत ने तुरंत अपनी ऑटोमैटिक कारबाइन की सभी पच्चीस गोलियां इंदिरा गांधी के शरीर के अंदर डाल दीं।

बेअंत सिंह का पहला फायर हुए पच्चीस सेकेंड बीत चुके थे और वहां तैनात सुरक्षा बलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। अभी सतवंत फायर कर ही रहा था कि सबसे पहले सबसे पीछे चल रहे रामेश्वर दयाल ने आगे दौड़ना शुरू किया।

लेकिन वो इंदिरा गांधी तक पहुंच पाते कि सतवंत की चलाई गोलियां उनकी जांघ और पैर में लगीं और वो वहीं ढेर हो गए। इंदिरा गांधी के सहायकों ने उनके क्षत-विक्षत शरीर को देखा और एक-दूसरे को आदेश देने लगे। एक अकबर रोड से एक पुलिस अफसर दिनेश कुमार भट्ट ये देखने के लिए बाहर आए कि ये कैसा शोर मच रहा है।

एंबुलेंस नदारद

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail
indira gandhi

उसी समय बेअंत सिंह और सतवंत सिंह दोनों ने अपने हथियार नीचे डाल दिए। बेअंत सिंह ने कहा, 'हमें जो कुछ करना था हमने कर दिया। अब तुम्हें जो कुछ करना हो तुम करो।' तभी नारायण सिंह ने आगे कूदकर बेअंत सिंह को जमीन पर पटक दिया।

पास के गार्ड रूम से आईटीबीपी के जवान दौड़ते हुए आए और उन्होंने सतवंत सिंह को भी अपने घेरे में ले लिया। हालांकि, वहां हर समय एक एंबुलेंस खड़ी रहती थी। लेकिन उस दिन उसका ड्राइवर वहां से नदारद था। इतने में इंदिरा के राजनीतिक सलाहकार माखनलाल फोतेदार ने चिल्लाकर कार निकालने के लिए कहा।

इंदिरा गांधी को जमीन से आरके धवन और सुरक्षाकर्मी दिनेश भट्ट ने उठाकर सफेद एंबेसडर कार की पिछली सीट पर रखा। आगे की सीट पर धवन, फोतेदार और ड्राइवर बैठे। जैसे ही कार चलने लगी सोनिया गांधी नंगे पांव, अपने ड्रेसिंग गाउन में मम्मी-मम्मी चिल्लाते हुए भागती हुई आईं। 

इंदिरा गांधी की हालत देखकर वो उसी हाल में कार की पीछे की सीट पर बैठ गईं। उन्होंने खून से लथपथ इंदिरा गांधी का सिर अपनी गोद में ले लिया। कार बहुत तेजी से एम्स की तरफ बढ़ी। चार किलोमीटर के सफर के दौरान कोई भी कुछ नहीं बोला। सोनिया का गाउन इंदिरा के खून से भीग चुका था। 

स्ट्रेचर गायब

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail

कार नौ बजकर 32 मिनट पर एम्स पहुंची। वहां इंदिरा के रक्त ग्रुप ओ आरएच निगेटिव का पर्याप्त स्टॉक था। लेकिन एक सफदरजंग रोड से किसी ने भी एम्स को फोन कर नहीं बताया था कि इंदिरा गांधी को गंभीर रूप से घायल अवस्था में वहां लाया जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड का गेट खोलने और इंदिरा को कार से उतारने में तीन मिनट लग गए। वहां पर एक स्ट्रेचर तक मौजूद नहीं था।

किसी तरह एक पहिए वाली स्ट्रेचर का इंतेजाम किया गया। जब उनको कार से उतारा गया तो इंदिरा को इस हालत में देखकर वहां तैनात डॉक्टर घबरा गए। उन्होंने तुरंत फोन कर एम्स के वरिष्ठ कार्डियॉलॉजिस्ट को इसकी सूचना दी। मिनटों में वहां डॉक्टर गुलेरिया, डॉक्टर एमएम कपूर और डॉक्टर एस बालाराम पहुंच गए।

एलेक्ट्रोकार्डियाग्राम में इंदिरा के दिल की मामूली गतिविधि दिखाई दे रही थीं लेकिन नाड़ी में कोई धड़कन नहीं मिल रही थी। उनकी आंखों की पुतलियां फैली हुई थीं, जो संकेत था कि उनके दिमाग को क्षति पहुंची है। एक डॉक्टर ने उनके मुंह के जरिए उनकी साँस की नली में एक ट्यूब घुसाई ताकि फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंच सके और दिमाग को जिंदा रखा जा सके। इंदिरा को 80 बोतल खून चढ़ाया गया जो उनके शरीर की सामान्य खून मात्रा का पांच गुना था।

डॉक्टर गुलेरिया बताते हैं, 'मुझे तो देखते ही लग गया था कि वो इस दुनिया से जा चुकी हैं। उसके बाद हमने इसकी पुष्टि के लिए ईसीजी किया। फिर मैंने वहां मौजूद स्वास्थ्य मंत्री शंकरानंद से पूछा कि अब क्या करना है? क्या हम उन्हें मृत घोषित कर दें? उन्होंने कहा नहीं। फिर हम उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले गए।'

सिर्फ दिल सलामत

indira gandhi death anniversary what happened on 31 october 1984 read full detail
इंदिरा गांधी - फोटो : डेमो

डॉक्टरों ने उनके शरीर को हार्ट एंड लंग मशीन से जोड़ दिया जो उनके रक्त को साफ करने का काम करने लगी और जिसकी वजह से उनके रक्त का तापमान सामान्य 37 डिग्री से घटकर 31 डिग्री हो गया। ये साफ था कि इंदिरा इस दुनिया से जा चुकी थीं लेकिन तब भी उन्हें एम्स की आठवीं मंजिल स्थित ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया।

डॉक्टरों ने देखा कि गोलियों ने उनके लीवर के दाहिने हिस्से को छलनी कर दिया था, उनकी बड़ी आंत में कम से कम बारह छेद हो गए थे और छोटी आंत को भी काफी क्षति पहुंची थी। उनके एक फेफड़े में भी गोली लगी थी और रीढ़ की हड्डी भी गोलियों के असर से टूट गई थी। सिर्फ उनका हृदय सही सलामत था।

योजना बनाकर साथ ड्यूटी
अपने अंगरक्षकों द्वारा गोली मारे जाने के लगभग चार घंटे बाद दो बजकर 23 मिनट पर इंदिरा गांधी को मृत घोषित किया गया। लेकिन सरकारी प्रचार माध्यमों ने इसकी घोषणा शाम छह बजे तक नहीं की।

इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वाले इंदर मल्होत्रा बताते थे कि खुफिया एजेंसियों ने आशंका प्रकट की थी कि इंदिरा गांधी पर इस तरह का हमला हो सकता है। उन्होंने सिफारिश की थी कि सभी सिख सुरक्षाकर्मियों को उनके निवास स्थान से हटा लिया जाए।

लेकिन जब ये फाइल इंदिरा के पास पहुंची तो उन्होंने बहुत गुस्से में उस पर तीन शब्द लिखे, 'आरंट वी सेकुलर? (क्या हम धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं?)' उसके बाद ये तय किया गया कि एक साथ दो सिख सुरक्षाकर्मियों को उनके नजदीक ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा।

31 अक्तूबर के दिन सतवंत सिंह ने बहाना किया कि उनका पेट खराब है। इसलिए उसे शौचालय के नजदीक तैनात किया जाए। इस तरह बेअंत और सतवंत एक साथ तैनात हुए और उन्होंने इंदिरा गांधी से ऑपरेशन ब्लूस्टार का बदला ले लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed