सुनंदा पुष्कर मौत मामले की जांच के लिए पुलिस एक नयी तकनीक फोरेंसिक साइकोलोजी (अपराध मनोविज्ञान) का प्रयोग करेगी, इस जांच में करीब आठ सप्ताह का समय लगेगा। इसके बाद रिपोर्ट पेश की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट को दी। मामले की सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी।
कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी 52 वर्षीय सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली होटल में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत मिली थी। हाईकोर्ट ने पिछली तारीख पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व जस्टिस चंद्रशेखर की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली पुलिस ने कहा कि कई विकसित देशों में इस नयी तकनीक फॉरेंसिक साइकोलोजी से आपराधिक मामलों की जांच की जा रही है। इसके इस्तेमाल से जांच में कोई कसर बाकी नहीं रहती, इसमें आठ सप्ताह का समय लगता है।
3 of 5
sunanda pushkar
- फोटो : अमर उजाला
खंडपीठ ने पुलिस से पूछा कि इस केस की जांच जनवरी 2014 से चल रही है तो तीन साल बाद इस नयी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्या किसी मामले की जांच को इतना लंबा खींचा जाना चाहिए। केंद्र सरकार की ओर से एएसजी संजय जैन ने कहा कि फोरेंसिक साइकोलोजी के इस्तेमाल से जांच में गलती की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
सुनवाई के दौरान भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि सुनंदा पुष्कर आईपीएल से जुड़ी थीं। इसलिए इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को मनी लांड्रिंग के पहलू की जांच करनी चाहिए। जवाब में संजय जैन ने कहा कि दिल्ली पुलिस पहले ही ईडी को पत्र लिख चुकी है।
5 of 5
sunanda pushkar
- फोटो : सोशल मीडिया
दूसरी ओर कोर्ट ने कहा कि इस समय ईडी को जांच का आदेश देकर जांच को उलझाना नहीं चाहती। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि मामले की जांच कब तक पूरी होगी। पुलिस दो सप्ताह में हलफनामा दायर कर बताए कि अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक दाखिल की जाएगी। भाजपा नेता स्वामी ने छह जुलाई को याचिका दायर कर केस की जांच के लिए एसआईटी बनाने और कोर्ट में निगरानी में जांच की मांग की थी।