भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर उनके प्रेस सलाहकार संजय बारू द्वारा लिखी पुस्तक 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर - द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ़ मनमोहन सिंह' पर इसी नाम से बनी फिल्म की वजह से पूर्व पीएम इन दिनों खासे चर्चा में हैं।
मनमोहन सिंह की बेटी का खुलासा, 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में नहीं दिखेंगी ये खास बातें
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पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर के पद से अपने करियर की शुरुआत करने वाले मनमोहन सिंह ने कैंब्रिज में भारत के निर्यात और आयात पर अपना शोध किया था। कैंब्रिज से वापस आने पर उन्हें विदेश व्यापार विभाग में बतौर सलाहकार रखा गया था। मनमोहन की बेटी दमन सिंह उनकी जीवनी 'स्ट्रिक्टली पर्सनल-मनमोहन एंड गुरशरन' में लिखती हैं, "मेरे पिता अपनी नम्रता को त्याग कर खुलेआम कहा करते थे कि उस समय विदेशी व्यापार के मुद्दों पर भारत में उनसे अधिक जानने वाला कोई नहीं था। उस समय उनके मंत्री थे ललित नारायण मिश्र।" "एक बार वो मनमोहन सिंह से नाराज हो गए, क्योंकि वो कैबिनेट को भेजे जाने वाले एक नोट से सहमत नहीं थे। मनमोहन सिंह ने कहा कि वो दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर की अपनी नौकरी पर वापस चले जाएंगे।" "प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सचिव पीएन हक्सर को इसकी भनक लग गई। उन्होंने कहा कि तुम वापस नहीं जाओगे। उन्होंने उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद 'ऑफर' कर दिया। इस तरह मंत्री से लड़ाई उनके लिए प्रमोशन लेकर आई।"
अंडा उबालना तक नहीं आता मनमोहन को
मनमोहन सिंह की बेटी दमन सिंह ने उन पर लिखी जीवनी में उनकी शख़्सियत के दूसरे पक्षों पर भी रोशनी डाली है। दमन सिंह लिखती हैं, "हर दो महीने पर हमारा पूरा परिवार बाहर खाने जाता था। हम या तो कमला नगर की कृष्णा स्वीट्स में दक्षिण भारतीय खाना खाते थे या दरियागंज के तंदूर में मुगलाई खाना। चीनी खाने के लिए हम मालचा रोड पर 'फ़ूजिया' रेस्त्रां में जाते थे और चाट के लिए हमारी पसंद होती थी बंगाली मार्केट।"
"मेरे पिता को न तो अंडा उबालना आता था और न ही टेलिविजन ऑन करना। हमें उनकी सरकारी गाड़ी पर बैठने का कभी मौका नहीं मिला। अगर हम किसी जगह पर जा रहे हों और वो जगह उनके रास्ते में पड़ रही हो, तब भी वो हमें अपनी सरकारी गाड़ी में नहीं बैठने देते थे। किन्हीं कारणों से उन्हें अपनी चाल पर नियंत्रण नहीं था।" "एक बार जब वो तेज चाल से चलने लगते थे तो उनकी चाल चाहने पर भी धीमी नहीं पड़ती थी और उनके साथियों को उनके साथ चलने में बहुत मशक्कत करनी पड़ती थी।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 'नहाने की कला' पर जो कुछ कहा उसपर काफ़ी हंगामा मचा, कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया। मगर मनमोहन सिंह के नहाने का जिक्र करीब 12 साल पहले न्यूजवीक में एक लेख में हुआ था। इसमें ये तो नहीं लिखा कि वो रेनकोट पहनकर नहाते थे या नहीं, पर ये जरूर लिखा कि वो कैसे नहाते थे। न्यूजवीक के संपादक फरीद जकारिया ने 2004 में अपने एक लेख में लिखा था कि अर्थशास्त्री जगदीश भगवती अपने सहपाठी मनमोहन सिंह के बारे में ये कहा करते हैं- "हम दोनों केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे, और मुझे एक गरीब किसान परिवार से आए उस नौजवान की बात छू गई जो हर सुबह चार बजे ठंडे पानी से नहाता था - इंग्लैंड की उस ठंड में!" भगवती कहते हैं, "मुझे तभी लगा था कि ये किसी मुकाम पर जाएगा।"