फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आरुषि हत्याकांड : अब इस कड़ी के बारे में सोच रही CBI...

Fri, 13 Oct 2017 10:57 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/ अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 13 Oct 2017 10:57 AM IST
विज्ञापन
in aarushi murdercase the cbi is thinking about someone third in the flat
demo pic

आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपति के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति का भी हाथ होने की संभावना पर सीबीआई की जांच कुछ दूर चलने के बाद ही ठहर गई। एजेंसी ने जांच की शुरूआत में डा. तलवार के कंपाउंडर कृष्ण और नौकर राजकुमार तथा विजय मंडल को गिरफ्तार कर पूछताछ की। मगर इसके बाद उनको क्लीन चिट देते हुए पूरी जांच तलवार दंपति पर केंद्रित कर दी।

in aarushi murdercase the cbi is thinking about someone third in the flat
demo pic

सीबीआई ने अपनी जांच में यह मान लिया कि घटना की रात फ्लैट अंदर से बंद था। फ्लैट के भीतर चार लोग राजेश तलवार, नुपुर तलवार, आरुषि और हेमराज ही थे। किसी ने रात में दरवाजा नहीं खोला तो फिर हत्या तलवार दंपति ने ही की है। हत्या में उपयोग किया गया औजार सर्जिकल था। कमरे में साक्ष्य मिटाए गए थे। जिस बेड पर आरुषि की लाश पड़ी थी, उसकी चादर बदली गई लिहाजा यह सब घर के भीतर मौजूद कोई व्यक्ति ही कर सकता है।

in aarushi murdercase the cbi is thinking about someone third in the flat
demo pic

सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद ने भी अपने फैसले में मुख्य रूप से यही आधार लिया कि जब बाहर से कोई नहीं आया तो हत्या घर के भीतर मौजूद लोगों ने ही की है। तलवार दंपति के वकीलों ने सीबीआई की इसी थ्योरी पर सवाल उठाए और अंतत: उसे गलत साबित किया। वकीलों ने फ्लैट में चार के बजाए सात लोगों की मौजूदगी की संभावना जताई। कृष्णा के बेड पर हेमराज के डीएनए प्रिंट का मौजूद होना। नौकर से बरामद खुखरी की जांच आदि कई ऐसे सवाल उठे जिन्होंने इस संदेह को पर्याप्त बल दिया कि घटना की रात फ्लैट में चार लोग ही मौजूद थे यह बात निर्विवाद रूप से साबित नहीं होती है। सीबीआई इस बात का पुख्ता सबूत नहीं दे पाई कि 15/16 मई 2008 की रात फ्लैट में चार लोग ही थे, या बाहर से कोई व्यक्ति नहीं आ सकता था।

विज्ञापन
विज्ञापन
in aarushi murdercase the cbi is thinking about someone third in the flat
demo pic

तलवार दंपति को बरी करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य रूप से इसी अवधारणा को खंडित किया है कि हत्या में किसी तीसरे पक्ष का हाथ होने की संभावना को पुख्ता रूप से खारिज नहीं किया जा सकता है। हत्या में तलवार दंपति का हाथ साबित करने के लिए घटनाक्रमों को जिस तारतम्यता के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए था वह भी सीबीआई नहीं कर पाई। बहस के दौरान सीबीआई की कहानी में कई जगह लोच नजर आया। आरुषि के कमरे का इंटरनेट राउटर घटना के कई घंटे बाद बंद हुआ। उसे किसने बंद किया, यह साबित नहीं हो सका।

विज्ञापन
in aarushi murdercase the cbi is thinking about someone third in the flat
arushi murder case

​सर्जिकल चाकू के अलावा हत्या में दूसरा कौन सा हथियार प्रयोग किया गया यह भी सीबीआई निर्विवाद रूप से साबित नहीं कर सकी। तलवार के वकीलों की दलील थी कि सीबीआई ने तलवार दंपति के अलावा किसी और का हाथ होने की संभावना पर जांच ही नहीं की और पहले से ही उनको दोषी मानते हुए सारी जांच उन्हीं पर केंद्रित कर दी। इस दलील को हाईकोर्ट ने भी सही माना है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed