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आरुषि हत्याकांड : ये बातें कह कर CBI के 39 पर भारी पडे़ डिफेंस के सात गवाह...

Fri, 13 Oct 2017 10:04 AM IST
संजय शिशौदिया/ अमर उजाला, गाजियाबाद
संजय शिशौदिया/ अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Fri, 13 Oct 2017 10:04 AM IST
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in aarushi murdercase defense seven witnesses won over cbi thirty nine witnesses
- फोटो : अमर उजाला

आरुषि-हेमराज मर्डर केस एक बार फिर चर्चाओं में है। इस मामले में हाईकोर्ट ने जहां तलवार दंपति को बाइज्जत बरी कर दिया है, वहीं एक बार फिर से यह दोहरा हत्याकांड ‘मिस्ट्री’ बन गया है। गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट में 212 दिन चले इस दोहरे हत्याकांड की सुनवाई के दौरान कुल 46 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए थे। इनमें से 39 गवाह सीबीआई ने और सात गवाह डिफेंस की ओर से पेश किए गए थे। खास बात यह है कि सीबीआई के 39 गवाहों पर डिफेंस के सातों गवाह भारी पडे़ थे। इसके बावजूद डिफेंस के गवाहों के बयानों को नजरअंदाज करके कोर्ट ने तलवार दंपति को सजा सुनाई थी। एम्स के सात डाक्टरों की टीम की जांच रिपोर्ट को भी नकार दिया था सीबीआई कोर्ट ने। अभियोजन और डिफेंस के प्रमुख गवाहों की बयान अमर उजाला अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहा है।

in aarushi murdercase defense seven witnesses won over cbi thirty nine witnesses
- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई के प्रमुख गवाहों के बयान:
‘घटना स्थल की फोटोग्राफी मैंने की थी। आरुषि की लाश के ऊपर बिना सिलवट वाली सफेद चादर पड़ी थी। बेड पर उसके टैडी बीयर आदि रखे हुए थे। चादर पर खून का कोई निशान नहीं था। कुल 23 फोटो खींचे थे।’ - चुन्नीलाल गौतम, पुलिस फोटोग्राफर
‘आरुषि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रभावित करने के लिए मेरे पास सिफारिशी फोन आया था। 16  मई 2008 को दोपहर करीब 12 बजे डा. सुशील चौधरी ने यह फोन डॉ. दिनेश तलवार के कहने पर किया था। वह चाहते थे कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार होने की बात न आए।’ - केके गौतम, रिटायर्ड सीओ
‘कत्ल वाली रात 11 बजकर 50 सेकेंड पर तलवार दंपति का इंटरनेट शुरू हुआ था जोकि 2 बजकर 4 मिनट और 30 सेकेंड तक चला। इसमें कुल 11835 किलोबाइटस इंटरनेट यूज किया गया। इसके बाद 16 मई 2008 की सुबह 2 बजकर 4 मिनट 35 सेकेंड को शुरू हुआ और 3 बजकर 2 मिनट 16 सेकेंड तक चला। इसमें 46 किलोबाइट इंटरनेट यूज किया गया।’ - दीपक कांडा, नोडल अफसर एयरटेल
‘छत पर जिस समय हेमराज की लाश मिली थी, उस समय वहां रखे कूलर का पानी भी लाल था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी ने उसमें खून सने हाथ धोए थे। रिटायर्ड सीओ केके गौतम का फोन पर वह एल-32 पहुंचे तो डॉ. तलवार की छत पर हेमराज की लाश पड़ी थी।’ - महेश मिश्रा, तत्कालीन एसपी सिटी नोएडा
‘आरुषि की गला कटी लाश उसके कमरे में बेड पर पड़ी थी। डॉ. राजेश तलवार से छत के दरवाजे की चाबी मांगी गई थी। क्योंकि बंद ताले पर खून के निशान लगे थे। राजेश तलवार ने कहा था कि चाबी नहीं है, आप ताला तोड़ने के चक्कर में समय खराब न करिए, नहीं तो हेमराज भाग जाएगा।’ - दाताराम नौनेरिया, तत्कालीन एसओ सेक्टर-20 नोएडा
‘17 मई 2008 को हेमराज की लाश का पोस्टमार्टम रात को 9 बजे कृत्रिम प्रकाश में किया था। पोस्टमार्टम के समय हेमराज के प्राइवेट पार्ट पर सूजन थी। ऐसा केवल दो ही स्थिति में होता है। एक तो मरने के समय कोई व्यक्ति सैक्स कर रहा हो या फिर करने वाला हो।  - डॉ. नरेशराज
‘दोहरा हत्याकांड डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार ने किया था। राजेश तलवार से गोल्फ स्टिक के बारे में पूछा था, मगर उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। सीएफएसएल जांच में पता चला था कि गोल्फ स्टिक किट में दो स्टिक बाकी अन्य स्टिक से ज्यादा साफ थीं। सीन ऑफ क्राइम की ड्रेसिंग की गई थी।’ - एजीएल कौल, एएसपी सीबीआई/मुख्य जांच अधिकारी
in aarushi murdercase defense seven witnesses won over cbi thirty nine witnesses
file photo - फोटो : अमर उजाला

डिफेंस के गवाहों के बयान :
‘आरुषि के अंतिम संस्कार के बाद मैं तलवार दंपति के घर गया था। माहौल तब भी गमगीन था और तलवार दंपति रो रहे थे। उस समय दिनेश तलवार वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से कह रहे थे कि हो सकता है कि आलाकत्ल मकान की छत पर हो। पुलिस ने छत के दरवाजे को टार्च की रोशनी में देखा और कहा कि यह दरवाजा बहुत दिन से नहीं खुला है। कल सुबह आकर देखेंगे।’ - राजेंद्र कौल, पड़ोसी
‘डेंटिस्ट को ओरल सर्जरी के लिए 15 नंबर ब्लेड की आवश्यकता होती है। पढ़ाई के दौरान इसी ब्लेड का प्रयोग सिखाया जाता है। ज्यादातर डेंटिस्ट इसे अपने क्लीनिक पर ही रखते हैं। इन स्कैलपेल से एक ही वार में किसी की गर्दन काटा जाना संभव नहीं। - डॉ. अमूल्य चड्ढा
‘बिना माइक्रोस्कोप से देखे यह नहीं बताया जा सकता कि एक लड़की के प्राइवेट पार्टस में जो डिस्चार्ज है, वह लड़की का है या बाहरी सोर्स का। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर ने सफेद डिस्चार्ज होना लिखा है तो उस पर माइक्रोस्कोप का कोई विवाद नहीं होगा।’- डॉ. उर्मिल शर्मा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह हत्याकांड न तो गोल्फ स्टिक से किया गया और न ही इसके लिए डाक्टरी पेश में प्रयुक्त धारदार ब्लेड़ स्कैलपेल का प्रयोग हुआ। गोल्फ स्टिक से चोट कारित करने पर डिप्रेस्ड फ्रैक्चर आता है और हड्डी दबी हुई नजर आती है। यह मत लोकार्ड के ‘पि्रंसीपल आफ एक्सचेंज’ पर आधारित है। जबकि आरुषि-हेमराज की पोस्टमार्टम रिपोर्टस में किसी भी चोट में डिप्रेस्ड फ्रैक्चर आना नहीं दिखाया गया है।’ - डॉ. आरके शर्मा, एम्स के पूर्व एडिशनल प्रोफेसर
‘आरुषि की लाश को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था, उस समय वह घर पर ही था। लाश को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाने के बाद ही उसने अपने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर मकान की धुलाई और सफाई की थी। यह सब वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछने के बाद ही किया गया था।’ - विकास सेठी
‘डॉ. बीके महापात्रा ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय अंतर्राष्ट्रीय फोरेंसिक कमेटी के मानक का ध्यान नहीं रखा। ऐसे में रिपोर्ट के गलत होने की आशंका है। डा. महापात्रा ने अपने बयान में कहा है कि उसे डीएनए से संबंधित ‘हार्डी बिनबर्ग लॉ के सिद्धांत’ की जानकारी नहीं है, यह कथन डा. महापात्रा की योग्यता पर प्रश्नचिंह लगाता है। जो भी डीएनए एक्सपर्ट इस सिद्धांत को नहीं जानता, वह सही प्रकार से डीएनए टेस्ट नहीं कर सकता। सभी देशों में डीएनए को लेकर कानून अलग-अलग हैं, मगर इसका विशलेषण करने का सिद्धांत पूरे विश्व में एक जैसा है।’ - डॉ. आंद्रे सेमिखोस्की, डीएनए एक्सपर्ट, लंदन

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file photo - फोटो : अमर उजाला

सीबीआई कोर्ट ने सिर्फ लास्ट सीन को माना सजा का आधार :
15/16 मई 2008 के लास्ट सीन को सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने सजा का आधार मानते हुए तलवार दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- 15 मई की रात साढ़े 9 बजे जब उमेश अपने घर गया था, तब घर में राजेश, नूपुर, आरुषि और हेमराज चारों लोग थे।
- 16 मई को जब प्रात: 6 बजे नौकरानी भारती आई तो इनमें से दो जिंदा थे और दो की हत्या हो चुकी थी।
- किसी बाहरी व्यक्ति के आसपास घूमना या टहलने तक का कोई साक्ष्य नहीं मिला।
- नूपुर ने नौकरानी से यह बहाना बनाया दरवाजा बाहर से बंद है, जबकि ऐसा नहीं था।
- नौकरानी जब अंदर गई तो मुल्जिमान रो रहे थे। दोनों के कपडे़ खून सने नहीं थे।
- 17 मई को हेमराज की लाश तलवार दंपति के फ्लैट की छत से मिलना।
- घर में तोड़फोड़ के भी किसी साक्ष्य का न मिलना।
- किसी बाहरी व्यक्ति की हिम्मत नहीं की हेमराज की बॉडी छत पर ले जाए और ताला भी बंद कर दे। न ही कोई बाहरी व्यक्ति हत्या के बाद घर में ही बैठकर शराब पी सकता है।
- आरुषि और तलवार दंपति के बीच लकड़ी का पार्टीशन था, बावजूद इसके हत्या के दौरान आरुषि के चिल्लाने की कोई आवाज तलवार दंपति के कानों तक क्यों नहीं पहुंची।
- घटना की रात इंटरनेट राउटर रात भर चला था। ऐसे में यह सिद्ध हो जाता है कि एक आरोपी जरूर जाग रहा होगा और उसी ने इंटरनेट का प्रयोग किया होगा।
- बाहर से किसी व्यक्ति के घर में आकर हत्याएं करना और चले जाना संभव नहीं लगता।

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file photo - फोटो : अमर उजाला

‘घर में चार लोग, दो की हत्या और दो बचे जिंदा’
तलवार दंपति को आरुषि-हेमराज मर्डर केस में दोषी मानते हुए सीबीआई कोर्ट ने इसके लिए दो महत्वपूर्ण आधार दिए थे। दोनों को 106 और 14 एविडेंस एक्ट के तहत कोर्ट ने दोषी माना था। 106 एडिवेंस एक्ट के तहत कोर्ट ने सीबीआई लोक अभियोजक बीकेसिंह की दलील को माना। लोक अभियोजक ने अपने फाइनल काउंटर में कहा था कि जिस रात घटना हुई, उस रात घर में सिर्फ 4 लोग थे। इनमें से 2 की हत्या हो गई, जबकि दो जिंदा बचे। पड़ताल में यह बात सामने आई है कि घर के अंदर न कोई आया और न ही कोई बाहर गया। ऐसे में तलवार दंपति ने ही दोनों की हत्या की और सबूत मिटाए। पुलिस को गुमराह करने के लिए राजेश तलवार ने अपने नेपाली नौकर हेमराज के खिलाफ आरुषि की हत्या का झूठा मुकदमा लिखवाया, जिससे पुलिस का ध्यान नेपाल की ओर चला जाए और उन्हें हेमराज की लाश ठिकाने लगाने का मौका मिल जाए।

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