लंबे समय से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। मंगलवार को पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई और फीडिंग ट्यूब पर कैप लगा दी गई है। हालांकि इसे अभी शरीर से हटाया नहीं गया है।
इसका फैसला सोमवार को चिकित्सकीय बोर्ड की बैठक में लिया गया था। सूत्रों की मानें तो पूरी प्रक्रिया उचित दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। इससे पहले हरीश के जीवनरक्षक उपचार और फीडिंग सपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा चुका है।
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हरीश राणा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सूत्र बताते हैं कि मानवीय पहल के तहत एम्स प्रशासन ने उनके माता-पिता निर्मला देवी और अशोक राणा को पैलिएटिव केयर सेंटर में रहने का इंतजाम किया है। उन्हें हरीश राणा के बगल वाले कमरे में रहने की अनुमति दी है। इससे वह मुश्किल समय में बेटे के साथ रह सकते हैं।
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हरीश राणा के पिता
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यह निर्णय मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एम्स चिकित्सक पूरी प्रक्रिया को दर्द-रहित और सम्मानजनक बनाने पर काम कर रहे हैं। फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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हरीश राणा का फ्लैट
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पैलिएटिव केयर के तहत दर्द प्रबंधन और मानसिक शांति पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। हरीश राणा के माता पिता पहले ही उनके कार्यशील अंगों के दान का संकल्प जता चुके हैं। हालांकि, यह मेडिकल जांच पर निर्भर करेगा। डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी हरीश राणा की देखभाल कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, जीवन बचाने के लिए कोई एक्टिव इलाज या वेंटिलेटर सपोर्ट उन्हें नहीं दिया जाएगा।
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हरीश राणा के पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पैलिएटिव केयर में मरीज को दर्द या किसी तरह की पीड़ा होने पर राहत देना होता है। ऐसे में हरीश के कई दिनों तक एम्स में एडमिट रहने की उम्मीद है। एम्स प्रबंधन ने विशेषज्ञ डॉक्टर के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई है। पांच सदस्यों की विशेष टीम में डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं जो दिन-रात हरीश की देखभाल कर रहे हैं।