भिवानी में दो नर कंकाल मिलने के बाद पुलिस के रडार पर आए गोरक्षक दल का जिला अध्यक्ष मोहित उर्फ मोनू यादव उर्फ मोनू मानेसर की पुलिस सरगर्मी के साथ तलाश कर रही है। मूलरूप से गुरुग्राम के मानेसर में गांव मानेसर का रहने वाले बजरंग दल से जुड़े मोनू मानेसर का विवादों से गहरा नाता रहा है। हाल ही में मोनू की एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी जिसमें गो तस्करों ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। कमिश्नरेट की पुलिस ने अलग-अलग दो मामलों में अज्ञात के खिलाफ जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज किया था। इस मामले की जांच चल रही है
जुनैद-नासिर हत्याकांड: कौन है मोनू मानेसर, नेटवर्क इतना मजबूत कि गो तस्करी की खबर पुलिस से पहले इसके पास होती
पुलिस के मुताबिक करीब सात वर्ष पहले तक मोनू मानेसर की साधारण आर्थिक पृष्ठ भूमि थी। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह दो भाई हैं जिनमें मोनू सबसे बड़ा है। एक बहन है उसकी शादी हो चुकी है। मोनू विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं। सात साल पहले गो रक्षक दल में कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू किया। वर्तमान में वह बजरंग दल का मानेसर मंडल का अध्यक्ष है और मोनू ने यहां से गांव-गांव में अपना नेटवर्क स्थापित किया। मोनू का नेटवर्क इतना मजबूत था कि मेवात, रेवाड़ी, गुरुग्राम और आसपास के जिलों में गो तस्करी से संबंधित किसी भी तरह की गतिविधि होने पर उसे सूचना मिल जाती थी। इसके कारण गो तस्करों के मंसूबे कई बार विफल हुए। कुछ दिन पहले गुरुग्राम की सड़कों पर गो तस्करों का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें बिना टायर के पहिए के गाड़ी तेज गति से चल रही थी और उसमें से चिंगारियां निकल रही थीं। यह पिकअप गाड़ी करीब 12 किलोमीटर तक इसी तरह चलती रही। गाड़ी से गाय फेंकते हुए भी वीडियो में देखा जा सकता था। वर्तमान में गुरुग्राम में मोनू की तहरीर पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे गो तस्करी के दर्ज हैं।
पुलिस भी रहती थी मोनू मानेसर के दबाव में
गो तस्करी रोकने के लिए कमिश्नरेट की पुलिस ने काउ टास्क फोर्स बना रखा है। गो तस्करी का मामला सामने आने पर इसके द्वारा जांच की जाती है। आलम यह रहता था कि गो तस्करी की सूचना मोनू के पास पहले होती थी पुलिस के पास बाद में। यूपी, राजस्थान, पंजाब के गो तस्करों के निकलने के बाद ही बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के पास सूचना आ जाती थी। इसके बाद गो रक्षक दल के लोग तस्करों को घेरने के लिए कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाते थे।
सात साल में फर्श से आया अर्श पर
सात साल पहले मामूली पारिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले मोनू मानेसर ने पिछले कुछ सालों में पैसा और नाम दोनों ही कमाया। सात सालों में उसके पास आई दौलत को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी होती हैं। गांव के लोगों की मानें तो गो तस्करी रोकने के उसके तरीके विवादों से परे नहीं रहे। इसी काम को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं होती रहीं हैं। साथ ही पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे। कहा यह भी जाता है कि पुलिस के संरक्षण के चलते ही मोनू इस दिशा में इतना आगे बढ़ सका।
मुकदमे वापस हुए तो उठे थे सवाल
मोनू मानेसर पर मारपीट, हत्या का प्रयास, धमकी, लूट आदि कई मामलों में जिले के अलग-अलग थानों में संगीन धाराओं में मुकदमे भी दर्ज थे। यह मुकदमे कुछ दिन पहले वापस लिए गए। उस समय दबी जुबान से यह कहा गया था कि मोनू के आंतक और पुलिस में उसके रसूख के चलते यह मुकदमे वापस लिए गए हैं। मोनू की ओर से पीड़ितों पर इतना दबाव था कि वह अपने मामलों की पैरवी करने में भी हिचकिचा रहे थे। यही वजह थी कि यह मुकदमे वापस ले लिए गए या कथित तौर पर उनमें समझौता हो गया।