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गुड़िया का इलाज करने वाले एम्स के डॉक्टरों की जुबानी, बर्बरता की कहानी

Sun, 19 Jan 2020 03:54 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 19 Jan 2020 03:54 PM IST
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gudiya assault case aiims doctors describe barbaric act on 5 year old still horrify remembering
- फोटो : सोशल मीडिया

दिल्ली के गांधीनगर में हुआ गुड़िया सामूहिक दुष्कर्म केस याद कर आज भी एम्स के उन डॉक्टरों के रोएं खड़े हो जाते हैं जिन्होंने उस मासूम का इलाज किया था। डॉक्टर कहते हैं यह केस उन चंद केसों में है जहां बर्बरता की सभी हदें लांघी गई हों। जानिए डॉक्टरों की जुबानी गुड़िया पर हुए जुल्म की कहानी...

gudiya assault case aiims doctors describe barbaric act on 5 year old still horrify remembering
- फोटो : सोशल मीडिया

बच्ची का इलाज करने वाले एम्स के डॉक्टर बताते हैं कि बच्ची के साथ इतनी ज्यादा हैवानियत की गई थी कि उसके निजी अंगों की कई कंस्ट्रक्टिव सर्जरी करनी पड़ी थी। बच्ची के निजी अंग में 200 मिलीलीटर वाली कांच की बोतल और मोमबत्ती के दो-तीन टुकड़े घुसा दिए गए थे।

gudiya assault case aiims doctors describe barbaric act on 5 year old still horrify remembering
- फोटो : सोशल मीडिया

डॉक्टरों ने बताया कि गुड़िया के होठों पर, गालों पर, बांह पर और गुदाद्वार पर कई चोटें थीं। उसके गले पर कई निशान थे जो ये बताते हैं कि उसका गला दबाने की कोशिश भी की गई। गुड़िया के साथ बर्बरता पड़ोस में रहने वाले युवकों ने 15 अप्रैल 2013 को की थी। बच्ची को दरिंदों के कब्जे से 40 घंटे बाद छुड़ाया जा सका था।

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gudiya assault case aiims doctors describe barbaric act on 5 year old still horrify remembering
- फोटो : सोशल मीडिया

शुरुआत में उसे पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि बाद में जब लोगों का गुस्सा फूटा तो बेहतर इलाज के लिए उसे एम्स में भर्ती कराया गया। पुलिस का कहना है कि बच्ची का गला रेतने की भी कोशिश की गई थी। गुड़िया को एक माह बाद अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन बाद में भी वो इलाज के लिए एम्स जाती रही।

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- फोटो : सोशल मीडिया

डॉक्टरों ने बताया कि जब गुड़िया अस्पताल से डिस्चार्ज हुई तो वह भोजन में हल्के ठोस पदार्थ लेने लगी थी और थोड़ी-थोड़ी बातें भी करने लगी थी। लेकिन वह न तो प्राकृतिक तरीके से पेशाब कर पाती थी और न ही शौच। इसके लिए उसकी कोलोस्टोमी हुई थी, जिसका मतलब है कि पेट में एक कृत्रिम छेद बनाया गया जिससे वह शौच आदि कर सके। हालांकि कुछ महीने बाद इसे बंद कर दिया गया और गुड़िया सामान्य तरीके से पेशाब और शौच करने लगी।

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