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कोयला बिजलीघरों को लचीला बनाकर बढ़ाई जा सकती है हरित ऊर्जा की क्षमता: सीएसई
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बिजली क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में हर साल करीब 9.2 से 10.1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बिजली की जरूरत पूरी करने में कोयले से चलने वाले बिजलीघरों की अभी भी बड़ी भूमिका है। ऐसे में देश के लिए जरूरी है कि नवीकरणीय ऊर्जा और कोयला आधारित बिजली व्यवस्था को बेहतर तरीके से एक साथ चलाया जाए। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोयला बिजलीघरों को जरूरत के हिसाब से अपनी बिजली उत्पादन क्षमता घटाने-बढ़ाने के लिए तैयार किया जाए तो देश को 18 से 34 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने की जगह मिल सकती है। इससे बिजली क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में हर साल करीब 9.2 से 10.1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, देश ने नवंबर 2025 में अपनी स्थापित बिजली क्षमता में 50 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया था। यह लक्ष्य 2030 के लिए तय समय से करीब पांच साल पहले हासिल हुआ। हालांकि, सौर ऊर्जा की तेज वृद्धि के कारण बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बन रहा है। पिछले छह वर्षों में देश में सौर ऊर्जा की क्षमता करीब 3.5 गुना बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बिजली की जरूरत पूरी करने में कोयले से चलने वाले बिजलीघरों की अभी भी बड़ी भूमिका है। ऐसे में देश के लिए जरूरी है कि नवीकरणीय ऊर्जा और कोयला आधारित बिजली व्यवस्था को बेहतर तरीके से एक साथ चलाया जाए। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर कोयला बिजलीघरों को जरूरत के हिसाब से अपनी बिजली उत्पादन क्षमता घटाने-बढ़ाने के लिए तैयार किया जाए तो देश को 18 से 34 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने की जगह मिल सकती है। इससे बिजली क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में हर साल करीब 9.2 से 10.1 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड की कमी की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, देश ने नवंबर 2025 में अपनी स्थापित बिजली क्षमता में 50 फीसदी हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया था। यह लक्ष्य 2030 के लिए तय समय से करीब पांच साल पहले हासिल हुआ। हालांकि, सौर ऊर्जा की तेज वृद्धि के कारण बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बन रहा है। पिछले छह वर्षों में देश में सौर ऊर्जा की क्षमता करीब 3.5 गुना बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है।