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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Greenways to be developed along drains; green-blue network to be created.

Delhi NCR News: नालों के किनारे बनेंगे ग्रीनवे, तैयार होगा हरित-जल नेटवर्क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 07:57 PM IST
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मास्टर प्लान 2047 : पैदल और साइकिल ट्रैक के साथ पार्क और वेटलैंड विकसित करने की योजना
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली को हरित और जल-संवेदनशील शहर बनाने के लिए मास्टर प्लान-2047 (एमपीडी-2047) में नालों, जल निकायों और हरित क्षेत्रों को आपस में जोड़ने की योजना है। नालों के किनारे खाली और हरित पट्टियों को ग्रीनवे के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें पैदल और साइकिल ट्रैक होंगे, जो शहर के विभिन्न हरित व जल क्षेत्रों को जोड़ेंगे। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग समेत संबंधित एजेंसियां इनके विकास का काम करेंगी।
ग्रीनवे को प्राकृतिक हरित पट्टी, लैंडस्केप, वेटलैंड या दलदली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। बारिश के पानी को रोकने और भूजल रिचार्ज में मदद के लिए बायोस्वेल्स भी बनाए जाएंगे। उपलब्ध जगह के अनुसार पार्क, योग स्थल, खेल क्षेत्र, कम्युनिटी गार्डन, वनस्पति उद्यानऔर खुले में प्रदर्शनियों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थान बनाए जा सकते हैं। कुछ स्थानों पर बोटिंग, छोटे कियोस्क और हेरिटेज ट्रेल की सुविधा भी प्रस्तावित है।
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योजना में बाढ़ प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई है। जलाशयों के पुनर्जीवन, पार्कों में वर्षाजल संग्रहण और नालों में ठोस कचरा डालने पर रोक जैसे उपायों से बारिश के पानी को रोकने और जमीन में उतारने पर जोर रहेगा।
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बेकार पड़ी जमीन भी आएगी काम
प्राकृतिक नालों और जल निकायों के आसपास बफर जोन बनाए जाएंगे। इनमें पेड़-पौधों और लैंडस्केपिंग के जरिए हरित क्षेत्र विकसित होंगे और निर्माण व पार्किंग की अनुमति नहीं होगी। बंद राजघाट और बदरपुर थर्मल पावर स्टेशन, अनुपयोगी सरकारी परिसरों तथा खराब हालत वाली जमीनों को सामाजिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और मनोरंजन गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। पुराने लैंडफिल के कचरे की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग से सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
लैंड-पूलिंग क्षेत्रों में भी बढ़ेगी हरियाली
लैंड-पूलिंग क्षेत्रों के पेड़-पौधों, वेटलैंड और निचले इलाकों को संरक्षित कर सार्वजनिक पार्क और एक्विफर रिचार्ज पॉन्ड के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ बायोडायवर्सिटी पार्क, माइक्रो फॉरेस्ट, अर्बन फॉरेस्ट, ग्रीन रूफ-टेरेस, कम्युनिटी व पॉलिनेटर गार्डन और अर्बन वेटलैंड को बढ़ावा दिया जाएगा। डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और अन्य एजेंसियां भूजल रिचार्ज के लिए कृत्रिम जलाशय भी विकसित करेंगी।

साहिबी नदी को मिल सकता है नया रूप
दिल्ली से बाहर स्थानांतरित औद्योगिक इकाइयों की खाली जमीन को भी हरित और खुले स्थानों के रूप में विकसित किया जा सकेगा। साहिबी नदी यानी नजफगढ़ ड्रेन को भी नया रूप देने की संभावना है। जरूरी मंजूरियां और व्यवहार्यता होने पर इसे नाव चलाने योग्य जलमार्ग और इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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