नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के 12वें मामले में भी सुुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी पाया। इसके पहले 11 अन्य मामलों में सुरेंद्र कोली को सीबीआई कोर्ट फांसी की सजा सुना चुकी है। दूसरे आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सुरेंद्र कोली की सजा पर शनिवार को सीबीआई के न्यायाधीश अमित वीर सिंह की अदालत में बहस होगी, इसके बाद सजा सुनाई जाएगी। निठारी कांड में चार और मामलों में सुनवाई चल रही है। जानिए क्या था 12वां मामला जिसमें कोली को दोषी करार दिया गया है...
निठारी कांड के 12वें मामले में सुरेंद्र कोली की सजा पर आज होगी बहस, माता-पिता ने कपड़ों से की थी बेटी की पहचान
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि निठारी गांव में रहने वाली एक लड़की सेक्टर-30 की में कोठियों में काम करती थी। वह 12 नवंबर, 2006 को एक घर में काम करने के लिए मां के साथ गई हुई थी। मां अपनी बेटी को सेक्टर 30 को जाने वाले रास्ते की पुलिया पर छोड़कर घर आ गई थी। इसके बाद लड़की कभी लौटकर नहीं आई। युवती के पिता और मां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
माता-पिता ने कपड़ों से की थी बेटी की पहचान
29 दिसंबर 2006 को सीबीआई ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार करके उसकी निशानदेही पर सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी के पास नाले से बच्चों के अवशेष बरामद किए थे। उस दौरान कोठी के पीछे वाले हिस्से में मृतकों के कपड़े सहित अन्य सामान बिखरे पड़े थे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान कोठी में भीड़ लग गई थी। इसी दौरान लड़की के मां-बाप भी वहां पहुंच गए। दोनों ने लड़की के सूट और सलवार की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने मामले में भी कोली के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बाद में कोली ने जुर्म कबूल कर बताया था कि उसने बच्चों की हत्या करके शव नाले में फेंक दिए थे। उसने लड़की के साथ दुष्कर्म कर हत्या का जुर्म भी कबूल किया था। गवाहों के बयान के आधार पर सीबीआई कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर को भी आरोपी बनाया था। नाले में मिले अवशेष और मां-बाप के डीएनए का मिलान भी हैदराबाद की लैब में हो गया था।
निठारी कांड के अन्य मामलों का खुलासा होने पर इस मामले को भी सीबीआई ने 11 जनवरी को अपने हाथ में ले लिया था। सीबीआई ने 26 जुलाई 2007 को अदालत में चार्जशीट पेश की थी। मामले में सीबीआई कोर्ट में 305 दिन सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 38 गवाह पेश किए।
19 मामलों में दर्ज हुई थी रिपोर्ट, तीन में क्लोजर रिपोर्ट
सीबीआई ने कुल 19 मामलों में रिपोर्ट दर्ज की थी। तीन मामलों में साक्ष्य न मिलने से क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी, जबकि 16 मामले सीबीआई कोर्ट में चले। अब तक 11 मामलों में फैसला आ चुका है, जबकि एक मामले में सजा पर शनिवार को बहस होगी। अभी चार और मामले अदालत में विचाराधीन हैं।