कमीशन के खेल ने मुरादनगर श्मशान घाट में 24 लोगों की जान ले ली। पिलर से लेकर गलियारे का छत डालने तक में मानकों का पालन नहीं किया गया। निर्माण सामग्री में सीमेंट की जगह रेत का अधिक इस्तेमाल किया गया। ऊपर से बिना डाइमेंशन के पूरा गलियारा खड़ा कर दिया गया। अभी तक की जांच से साफ हो गया है कि गलियारा घोटाले की रेत से बनाकर खड़ा हुआ था। डीएम के निर्देश पर इंजीनियर्स की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की की टीम ने भी रविवार से जांच शुरू कर दी है। आगे पढ़ें पूरी खबर और जानें कैसे सरकारी ठेकों में होती है गड़बड़ी...
2 of 7
मुरादनगर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
जांच में टीमों ने पाया है कि बिना डाइमेंशन के गलियारा बनाया गया। ऊपर से निर्माण सामग्री में रेत का भरपूर इस्तेमाल किया गया, जिससे सरिया (मसाले) और सीमेंट के बीच पकड़ कमजोर रही। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि किसी भी निर्माण से पहले चारों भुजाओं को नापा जाता है। फिर बिल्डिंग के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर लंबाई, ऊंचाई और चौड़ाई के हिसाब से पूरा डाइमेंशन तैयार किया जाता है। इससे तय होता है कि कितने पिलर बनाए जाएंगे और उनकी मोटाई कितनी होगी औरकिस ग्रेड की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन गलियारे के निर्माण में कोई डाइमेंशन तैयार नहीं किया गया।
3 of 7
Muradnagar hadsa
- फोटो : कुमार संजय
पिलर (कॉलम) उचित दूरी पर नहीं बनाए गए थे। इनमें भी उचित ग्रेड के मैटेरियल का सही इस्तेमाल नहीं किया गया। छत की लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से क्रास बीम की आवश्यकता थी जो नहीं डाला गया। छत में भी मानकों के हिसाब से उचित ग्रेड के मैटेरियल का इस्तेमाल नहीं हुआ, जिसकी जांच आईआईटी रुड़की या किसी संबंधित सेंट्रल एजेंसी से कराई जानी चाहिए। साथ में कमेटी ने भी लिखा कि मलबे को देखकर स्पष्ट प्रतीत होता है कि मैटेरियल में रेत का ज्यादा इस्तेमाल हुआ जिससे छत में डाले गए सरिया के जाल और मैटेरियल के बीच पकड़़ काफी कमजोर रही।
4 of 7
मुरादनगर श्मशान घाट में सील भवन
- फोटो : अमर उजाला
यह भी एक कारण रहा कि पूरी छत एक ही झटके में ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिर गई। उधर, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की टीम ने भी रविवार को घटना स्थल का दौरा किया। निर्माण स्थल से मलबे के नमूने भी जांच के लिए जुटाए हैं, जिन्हें लैब भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि जांच कर रही कमेटी ने भी शुरूआती जांच में डाइमेंशन के साथ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब होनी की बात कही है। बाकी लैब से रिपोर्ट आने के बाद कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
5 of 7
muradnagar accident
- फोटो : अमर उजाला
हर दर पर की शिकायत, पर नहीं हुई सुनवाई
घोटाले को लेकर एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ा दी है। एसआईटी टीम ने मामले से जुड़ी उन शिकायतों को भी जुटाना शुरू कर दिया है जो पालिका के निर्माण से जुड़े अन्य घोटालों पर स्थानीय लोगों और सभासदों की तरफ से की गई। बताया जा रहा है कि टीम को कई अहम साक्ष्य मिले हैं जिनसे पता चलता है कि अगर स्थानीय प्रशासन मामले में समय रहते गंभीरता दिखाता तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता। लोगों की तरफ से समय-समय पर शिकायतें की गई लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं की गई। कुछ शिकायतकर्ताओं को डरा धमकाकर बैठा दिया गया तो कुछ मामलों में चुप्पी साध ली गई। स्थानीय विधायक और सांसद से भी लोगों ने शिकायत की। यही नहीं लोगों ने कई बार नगर पालिका कार्यालय पर घेराव भी किया लेकिन चुनिंदा पार्षदों के इशारे पर किया गया विरोध बताकर शिकायतों को डस्टबिन में डाला गया। ईओ ने शिकायतों के बाद भी अपनी तरफ से किसी निर्माण में उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति तक की नहीं की।