यूपी: केमिकल फैक्ट्री में शार्ट सर्किट से लगी आग, आसपास की कंपनियों में भी भारी नुकसान
मुख्य अग्निशमन अधिकारी मनु शर्मा ने बताया कि नियमों की अनदेखी कर चलाई जा रहीं केमिकल फैक्ट्रियों में न वाटर टैंक हैं और ना ही पानी के भंडारण की सुविधा। मनु शर्मा ने बताया कि प्रत्येक केमिकल फैक्ट्री में पांच हजार लीटर एक वाटर टैंक और डेड लाख लीटर पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
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औद्योगिक क्षेत्र में आए दिन हो रहीं आगजनी की भीषण घटनाओं से फैक्ट्री संचालक कोई सबक नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि औद्योगिक क्षेत्र एक बार सुलग उठा। हापुड़ जिले के धौलाना में केमिकल फैक्ट्री में लगी आग के चलते भयावह स्थिति पैदा हो गई। फेज टू-जी ब्लाक में संचालित ऑर्गनो केम फैक्ट्री में लगी भीषण आग पर काबू पाने के दौरान दो मजदूर झुलस गए। जिन्हें इलाज के लिए दिल्ली स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाने के लिए करीब 10 दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
भीषण आग ने जमकर कहर बरपाया। फैक्ट्री में काम करने वाले खिचरा के संजीव पुत्र जसवीर और अनुभव पुत्र सुनील बुरी तरह झुलस गए। मजदूरों को आनन-फानन दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। केमिकल फैक्ट्री से सटी जूट फैक्ट्री संख्या जी-373 भी जलकर तबाह हो गई। जबकि फैक्ट्री संख्या 377, 386, 387, 388 में टीन शेड समेत अन्य नुकसान हुआ है। आग लगने का मुख्य कारण शॉर सर्किट बताया जा रहा है। फैक्ट्री के मालिक से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई।
आए दिन आगजनी की भयानक घटनाएं दिल दहलाती हैं
एमजीआर इंड्रस्ट्रियल एसोसिएशन अध्यक्ष दीपक शर्मा का कहना है कि आए दिन आगजनी की भयानक घटनाएं दिल दहलाती हैं। बेतरतीब बसी यूपीएसआईडीसी में आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को घंटों मौके तक पहुचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
मसूरी-धौलाना मार्ग पर स्थित यूपीएसआईडीसी एरिया में करोड़ों का राजस्व देने वालीं सैकड़ों फैक्ट्रियां बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही हैं। उद्यमियों को होने वाली परेशानियों से शासन-प्रशासन बेखबर है। आग पर काबू पाने के साधन से कोसों दूर इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 1250 फैक्टरिया संचालित हैं। क्षेत्र में करीब 125 ऐसी फैक्ट्री हैं, जिनमें बॉयलर लगे हुए हैं।
एमजीआर इंडस्ट्रियलिस्ट वेलफेयर महासचिव बबलू चौधरी बताते हैं कि किसी आपात स्थिति में यहां राहत एवं बचाव कार्यों में मुश्किल आती है। सुविधाओं का अभाव है। प्रशासन की नींद तब टूटती है, जब कोई कोई बड़ा हादसा होता है।
इस वर्ष यूपीएसआईडीसी में हो चुकी आगजनी की घटनाएं
- 22 नंवबर को ऑर्गनो केम इंडिया में लगी आग
- 29 अक्तूबह को सजल पैट्रोकैमिल्स फैक्ट्री में लगी आग
- 17 जुलाई मलिक कबाड़ फैक्ट्री में लगी भीषण आग
- 4 जुलाई लीना आर्गेनिक कैमिकल से भरे टैंकर में लगी आग
- 1जनवरी यूपीएसआईडीसी फेज टू एफ ब्लॉक भूखंड संख्या 633 में संचालित इको टैक्स कैमिकल में लगी भीषण आग से करोड़ों का नुकसान, मजदूर झुलसे।