साइबर सेल ने कौशांबी के पैसेफिक मॉल में एक साल से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। गिरोह अभी तक 500 विदेशी नागरिकों से करीब आठ करोड़ रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस ने दो महिला समेत 15 शातिरों को गिरफ्तार किया है। सभी ब्रेया कॉलिंग एप से अमेरिका छदन (फर्जी हेल्पलाइन नंबर) डालकर विदेशियों के कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को हैक कर लेते थे। फिर मदद का आश्वासन देकर चार-पांच हजार डॉलर की ठगी करते थे।
फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: 500 से अधिक विदेशी नागरिकों से आठ करोड़ ठगे, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कर लेते थे हैक
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सीओ साइबर सेल अंशु जैन ने बताया कि फर्जी कॉल सेंटर में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक काम होता था। इसे हितेश, सौरभ और पारस मिलकर चला रहे थे। टीम ने वहां से दो महिलाएं और 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला कि हितेश, सौरभ और पारस ने सभी कर्मचारियों को विदेशियों को ठगी के जाल में फंसाने के कई तरीके बताए हुए थे। हर कर्मचारी को 40 से 50 हजार रुपये का वेतन मिलता था। इतना ही नहीं, कर्मचारियों को लग्जरी गाड़ी भी दी हुई थी। तीनों मुख्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, उनकी तलाश में टीमों को लगाया हुआ है।
यह आरोपी हुए गिरफ्तार, गाड़ी और सिस्टम बरामद
साइबर सेल प्रभारी सौरभ विक्रम सिंह ने बताया कि नदीम निवासी भोपतपुर एटा, अभिषेक राणावत निवासी शालीमार गार्डन, ओम शर्मा निवासी गोविंदपुरम, आकाश शर्मा निवासी अलीगढ़, राजा चौहान निवासी राधा स्काई गार्डन सेक्टर-16 बी ग्रेटर नोएडा, रणजीत कुमार निवासी नोएडा, ताबिश निवासी इंदिरापुरम, रोहित कुमार निवासी दिल्ली, ऋषि दूबे निवाासी जैतपुर दिल्ली, नवदीप मलिक (सुपरवाइजर) निवासी फरीदाबाद, ऋषभ वशिष्ट निवासी न्यू लायलपुर कालोनी दिल्ली, मेहरुनिशा निवासी ग्रेटर नोएडा, अरुण कुमार निवासी खिचड़ीपुर, सत्यनारायण निवासी औरंगाबाद और लोपामुद्रा निवासी राधा स्काई गार्डन सेक्टर-16 नोएडा वेस्ट को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर में मुख्य आरोपियों के नहीं रहने पर दीप ताबिश कर्मचारियों को काम बताता था। इनके पास से 15 मोबाइल, 22 कंप्यूटर सिस्टम, छह आधार कार्ड, एक पैनकार्ड, एक डीएल, एक वोटर आईडी कार्ड, भारतीय व विदेशियों से ठगी किए गए नौ चेक की फोटोकॉपी व चार लग्जरी कार बरामद की है।
नाम बदलकर करते थे बात
साइबर सेल प्रभारी के मुताबिक, कॉल सेंटर में स्टाफ के लोग जब भी विदेशियों से बात करते थे तो महिलाएं अपना नाम लोपा, एंड्रयू जबकि युवक जेम्स और फेरी नाम बताकर अपने जाल में फंसा लेते थे। इनका तरीका होता था कि यह सिस्टम हैक करने के बाद इंटरनेट को यूपीएस से कनेक्ट रखते थे। जैसे ही स्टाफ के पास मदद के लिए कॉल आती थी तो उन्हें अलग-अलग तरह से ठगी के जाल में फंसाते थे।
साइबर सेल और लिंकरोड पुलिस कर रही जांच
थाने के पास चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ होने के बाद लिंकरोड पुलिस और साइबर सेल टीम अन्य फर्जी कॉल सेंटर का पता करने में जुट गई है। लिहाजा एसपी सिटी सेकेंड ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने इंदिरापुरम, कौशांबी, साहिबाबाद क्षेत्र में टीम को कॉल सेंटर की हिस्ट्री खंगालने के निर्देश दिए हैं।