बुलंदशहर के लखावटी उप डाकघर के निलंबित उप डाकपाल राहुल कुमार रविवार सुबह गिरधारीनगर स्थित अपने आवास के पास ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। राहुल पर ढाई करोड़ के टिकट गबन का आरोप था। शुक्रवार को सीबीआई ने इस मामले में पूछताछ की थी। मौत से पहले सुसाइड नोट भी अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया था।
उप डाकपाल राहुल कुमार ने सुसाइड नोट में मंडलीय जांच टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल ने लिखा है कि मेरी मौत का जिम्मेदार फर्जी टिकट लगाकर लाने वाला ग्राहक राजेश और मंडलीय कार्यालय की ओर से की गई दोगली जांच है।
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उप डाकपाल राहुल कुमार की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
'उन्हें और खुश होने का मौका दिया जाए'
राजेश और मंडलीय टीम ने मेरा सबकुछ छीन लिया है। इसलिए मैं अपनी जान ले रहा हूं। मेरी अंतिम इच्छा है कि सभी को माफ कर दिया जाए। मेरी मौत के बाद उन्हें और खुश होने का मौका दिया जाए। उसने मंडलीय टीम पर शोषण और जातीय टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया है। उप डाकपाल राहुल ने सुसाइड नोट में लिखा है कि 23 नवंबर को बुक हुई 5599 रजिस्ट्री के डिस्पैच और उन पर लगे टिकट को लेकर 26 नवंबर को उसे निलंबित कर दिया गया। राहुल का कहना है कि मंडलीय कार्यालय की टीम के सामने ही राजेश सभी आर्टिकल लेकर आया था। उसने खुद ही टिकट लगाए थे।
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उप डाकपाल राहुल कुमार का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
'कुछ समय पहले डिबाई में भी फर्जी डाक टिकट से डाक बुक की गई थी'
सीबीआई के समक्ष राजेश ने इसे स्वीकार भी किया है। सीबीआई को राजेश ने यह भी जानकारी दी है कि उसने टिकट कहां से खरीदे हैं। इसके बावजूद मंडलीय कार्यालय उसे निलंबित कर दिया। मंडलीय कार्यालय की टीम पर आरोप लगाते हुए लिखा कि कुछ समय पहले डिबाई में भी फर्जी डाक टिकट से डाक बुक की गई थी। इसकी जांच भी मंडलीय कार्यालय की टीम ने की। वहां किसी को भी निलंबित नहीं किया गया। किसी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई गई।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े परिजन
- फोटो : अमर उजाला
राहुल ने लिखा कि मंडलीय कार्यालय की टीम के अधिकारी की पत्नी के शादी से पहले दो विभागीय कर्मचारियों से संबंध थे। शादी के बाद भी उसके एक अन्य कर्मचारी से संबंध हो गए। महिला भी विभाग में ही कार्यरत है। इसकी जानकारी उसे हो गई थी। इसी बात का बदला लेने के लिए जांच अधिकारी मंडलीय कार्यालय की टीम के साथ शोषण करने की योजना बनाई।
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उप डाकपाल द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट
- फोटो : अमर उजाला
जाति की वजह से हुआ मेरा शोषण
सुसाइड नोट में ही राहुल ने लिखा कि विभाग में कार्य करते हुए 14 वर्ष हो गए। इस दौरान काफी लगन से काम किया। इसके लिए कई बार सम्मानित भी किया गया। मेडल लखावटी उप डाकघर में रखे हुए हैं। मैं कर्मचारी यूनियन का उपसचिव भी हूं। नियमानुसार मुख्य डाकघर के आठ किलोमीटर के परिक्षेत्र में ही रखा जाना चाहिए था लेकिन जातिगत शोषण के कारण ऐसा नहीं किया गया।