गाजियाबाद के भोपुरा तिराहे पर शनिवार सुबह एलपीजी गैस सिलिंडर से भरे ट्रक में लगी आग ने 60 हजार से भी ज्यादा लोगों के दिलों को दहलाकर रख दिया। एक के बाद एक करीब 20 मिनट तक सिलिंडर फटने के धमाकों की आवाज सुनाई देती रही। हादसा इतना भीषण था कि धमाकों की गूंज दिल्ली तक पहुंची और उसे सुनकर दिल्ली के मंडोली में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बटालियन भी पहुंच गई। धमाकों की आवाज घटनास्थल से करीब 10 किमी तक साफ सुनाई दी।
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गैस सिलिंडर से भरे ट्रक में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
भोपुरा तिराहे के आसपास डिफेंस कॉलोनी, डीएलएफ कॉलोनी, कोयल एंक्लेव, विक्रम एंक्लेव, पसौंडा समेत कई रिहायशी इलाके हैं। इन इलाकों में घनी आबादी बसी है। हादसे के ठीक पास स्थित डिफेंस और डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले महिलाओं, बच्चे, बुजुर्गों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। किसी ने घर के बाहर निकलकर तो किसी ने घर की छत से आसमान में उठते आग के ऊंचे गुबार देखे। वहीं सिलिंडरों के फटकर घरों में पहुंचने पर भगदड़ सी मच गई।
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गैस सिलिंडर से भरे ट्रक में लगी आग
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धमाकों की आवाज सुनकर सीआरपीएफ की बटालियन ने मौके पर पहुंचकर तुरंत स्थानीय लोगों को घटनास्थल से दूर जाने में मदद की। यहां तक कि दमकल टीम के साथ मिलकर घरों में फंसे लोगों को बाहर भी निकाला और बचाव दल का सहयोग किया। लगातार हो रहे धमाकों से कॉलोनी और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की तरफ भाग गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना के बाद आधी से ज्यादा कॉलोनी खाली हो गई थीं।
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मोर्चा संभालने के तैयार रहे पेट्रोल पंप कर्मचारी
जिस स्थान पर खड़े ट्रक में आग लगी उसके ठीक पीछे और सामने दो पेट्रोल पंप हैं। सामने स्थित भारत पेट्रोलियम पंप के कर्मचारी पवन ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात पंप पर उन्हें मिलाकर छह कर्मचारी ड्यूटी पर थे। ट्रक में अचानक आग लगी थी। उसमें रखे सिलिंडर फटने लगे। जलते सिलिंडरों के कई टुकड़े पंप में भी आकर गिरे। उन्होंने तुरंत पंप मैनेजर अजय भाटी को फोन करके सूचना दी। साथ ही पंप की सभी मशीनें बंद कर दी और विद्युत सप्लाई बंद कर जनरेटर भी बंद कर दिया।
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गैस सिलिंडर से भरे ट्रक में लगी आग
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कुछ ही देर में जलते हुए तीन गैस सिलिंडर पंप के बाहर विद्युत ट्रांसफार्मर से टकराकर फट गए, इसकी वजह से ट्रांसफॉर्मर भी टूटकर गिर गया। ट्रांसफार्मर के पास ही कपिल की पंचर बनाने की दुकान है, जो पूरी तरह से जलकर राख हो गई। स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर पंप में गिरे सिलेंडर व उनके टुकड़ों को किसी तरह मशीनों तक पहुंचने से रोका। कुछ टुकड़े मशीनों के पास लगे रैक के शीशे तोड़ पार निकल गए।