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गाजियाबाद धर्म परिवर्तन: 13 अगस्त को मुंबई में लिखी गई थी स्क्रिप्ट, पवन बौद्ध ने बताई पूरी कहानी

Thu, 22 Oct 2020 11:25 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, साहिबाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, साहिबाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 22 Oct 2020 11:25 AM IST
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Ghaziabad religion conversion Pawan baudh tells complete story since planning from mumbai 
करहेड़ा की वाल्मीकि बस्ती में लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म - फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद स्थित करहेड़ा की वाल्मीकि बस्ती में 50 परिवारों के 236 लोगों द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने की स्क्रिप्ट 13 अगस्त को ही मुंबई में लिख ली गई थी। पवन बौद्ध ने बताया कि तीन अगस्त को रक्षाबंधन की रात में उसके सीने में अचानक दर्द उठा था। इलाज कराने के लिए वह अपने ममेरे भाई के पास मुंबई गए थे। वहां कुछ दिन रुकने के बाद उन्होंने 13 अगस्त को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के परपौत्र राजरत्न आंबेडकर से मुलाकात की। उन्हें सामाजिक परेशानियों के बारे में बताया। 


 
Ghaziabad religion conversion Pawan baudh tells complete story since planning from mumbai 
पवन बौद्ध - फोटो : अमर उजाला
पवन का दावा है कि उन्होंने उसी दिन बौद्ध धर्म अपना लिया। इसके बाद हाथरस कांड हुआ तो अनुसूचित जाति की बिटिया का आधी रात में अंतिम संस्कार करने और परिवार को कई दिनों तक घर में रखने के अलावा गांव में पुलिस बल तैनात रहने की तस्वीरों ने उनके बौद्ध धर्म अपनाने के निर्णय को और मजबूत कर दिया। धर्म परिवर्तन की जानकारी पवन ने अपने हाथरस स्थित ससुराल और करहेड़ा में परिजनों को दी।

 
Ghaziabad religion conversion Pawan baudh tells complete story since planning from mumbai 
करहेड़ा की वाल्मीकि बस्ती में लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म - फोटो : अमर उजाला
परिवार संग अन्य लोगों के साथ बैठक में लिया निर्णय
बताया गया कि इस वाल्मीकि बस्ती में 70 से अधिक जाटव और वाल्मीकि समाज के घर हैं, जबकि करहेड़ा के दूसरे हिस्से में समाज के अन्य लोग रहते हैं। मुंबई से लौटने के बाद पवन ने परिवार के लोगों को बौद्ध धर्म के बारे में जानकारी दी। दावा है कि इसके बाद एकमत से इस धर्म को अपनाने की सहमति बन गई। मुंबई में राजरत्न आंबेडकर से दोबारा संपर्क किया गया। अब 14 अक्तूबर का कार्यक्रम तय किया गया। पवन की माने तो कार्यक्रम में 50 परिवार के 236 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें महिलाएं, बच्चे, पुरुष और बुजुर्ग शामिल हुईं। सभी को राजरत्न आंबेडकर ने 22 प्रतिज्ञाएं कराकर धर्म में शामिल कराया।


 
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करहेड़ा की वाल्मीकि बस्ती में लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म - फोटो : अमर उजाला
करहेड़ा के बाद अब अन्य इलाकों के लोग भी तैयार
स्थानीय लोगों ने कहा कि हाथरस कांड में पीड़ित परिवार के साथ उत्पीड़न और अत्याचार से समाज के लोग दुखी हैं। ऐसे में इन 50 परिवारों को छोड़कर अब बाकी 20 घर व शहर के अन्य इलाकों से भी वाल्मीकि समाज के लोग उनके संपर्क में हैं, जो स्वेच्छा से बौद्ध धर्म अपनाना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने इस दावे का कोई प्रमाण नहीं दिखाया। करहेड़ा में सर्वधर्म सत्संग के इंद्रराम महाराज का कहना है कि अभी वाल्मीकि समाज के लोग हाथरस मामले में दो नवंबर को कोर्ट से आने वाले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा डीएम को जो 15 मांगे लिखित रूप में दी गई हैं। यदि वह पूरे नहीं होती हैं तो फिर लोगों के साथ बैठककर आगे की योजना तैयार की जाएगी।

 
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करहेड़ा की वाल्मीकि बस्ती में लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म - फोटो : अमर उजाला
यह हैं 15 अन्य मांगे
डीएम अजय शंकर पांडेय को लोगों ने जो लिखित मांगे दी हैं। उनमें नौकरी की समस्या, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना का लाभ, लॉकडाउन के चलते बिजली की समस्या, सामुदायिक भवन की समस्या, खेलकूद के मैदान व इंटर स्कूल बने, जाति प्रथा का भेदभाव खत्म हो, विधवा पेंशन, जाटव व वाल्मीकि समाज की कुएं की समस्या, आवास समस्या से राहत, आयुष्मान योजना का लाभ, बीपीएल राशन योजना और पानी की समस्या दूर करने की मांग हैं। 
 
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