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Delhi NCR News: डीपीएल में खिलाड़ी चयन को लेकर विवाद
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डीडीसीए ने नियम की समीक्षा का फैसला किया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) में न्यू दिल्ली टाइगर्स के खिलाड़ी देव चौधरी के चयन को लेकर उठे सवालों ने डीडीसीए की चयन प्रक्रिया और टूर्नामेंट नियमों पर बहस छेड़ दी है। डीडीसीए ने लीग खत्म होने के बाद उस नियम की समीक्षा करने का फैसला किया है, जिसके तहत फ्रेंचाइजी नीलामी के बाहर स्थानीय लीग से खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती हैं।
इस सीजन के नियमों के अनुसार, सभी आठ फ्रेंचाइजी नीलामी के अलावा अपनी पसंद के तीन स्थानीय खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती थीं, बशर्ते खिलाड़ी ने डीडीसीए लीग में कम से कम पांच मैच खेले हों। इसी प्रावधान के तहत देव चौधरी को न्यू दिल्ली टाइगर्स ने शामिल किया। उन्होंने दक्षिण दिल्ली के खिलाफ दो गेंदों पर शून्य पर आउट होने के बाद पश्चिम दिल्ली के खिलाफ 24 गेंदों पर 16 रन बनाए, लेकिन पावरप्ले में उनका रक्षात्मक रवैया व डॉट गेंदें चर्चा का विषय बनीं।
डीडीसीए के वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही इस नियम का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि केवल पांच स्थानीय मैचों को डीपीएल में प्रवेश का आधार बनाना उचित नहीं है और कुछ खिलाड़ी सिफारिश के आधार पर चुने गए हैं। डीडीसीए सचिव अशोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद नियम की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। टीम प्रबंधन से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) में न्यू दिल्ली टाइगर्स के खिलाड़ी देव चौधरी के चयन को लेकर उठे सवालों ने डीडीसीए की चयन प्रक्रिया और टूर्नामेंट नियमों पर बहस छेड़ दी है। डीडीसीए ने लीग खत्म होने के बाद उस नियम की समीक्षा करने का फैसला किया है, जिसके तहत फ्रेंचाइजी नीलामी के बाहर स्थानीय लीग से खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती हैं।
इस सीजन के नियमों के अनुसार, सभी आठ फ्रेंचाइजी नीलामी के अलावा अपनी पसंद के तीन स्थानीय खिलाड़ियों को टीम में शामिल कर सकती थीं, बशर्ते खिलाड़ी ने डीडीसीए लीग में कम से कम पांच मैच खेले हों। इसी प्रावधान के तहत देव चौधरी को न्यू दिल्ली टाइगर्स ने शामिल किया। उन्होंने दक्षिण दिल्ली के खिलाफ दो गेंदों पर शून्य पर आउट होने के बाद पश्चिम दिल्ली के खिलाफ 24 गेंदों पर 16 रन बनाए, लेकिन पावरप्ले में उनका रक्षात्मक रवैया व डॉट गेंदें चर्चा का विषय बनीं।
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डीडीसीए के वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही इस नियम का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि केवल पांच स्थानीय मैचों को डीपीएल में प्रवेश का आधार बनाना उचित नहीं है और कुछ खिलाड़ी सिफारिश के आधार पर चुने गए हैं। डीडीसीए सचिव अशोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद नियम की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। टीम प्रबंधन से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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