मुरादनगर में लिफ्ट का गेट खुलने के बाद पैर रखते ही तीसरी मंजिल से गिरकर रिटायर्ड एक्सईएन केदारनाथ गौड़ (76) की मौत हो गई। उक्त घटना गुरुवार शाम मुरादनगर थाना क्षेत्र में मोरटा-शाहपुर मार्ग स्थित मोती रेजिडेंसी सोसायटी में हुई। घटना के बाद सोसायटी के रेजिडेंट्स ने बिल्डर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा और नारेबाजी की। पुलिस ने गुस्साए लोगों को समझाकर शांत किया और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक के बेटे ने मामले में तहरीर दी है।
लिफ्ट आए बिना ही खुल गया गेट, पैर रखते ही तीसरी मंजिल से गिरे रिटायर्ड एक्सईएन, मौत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
13 मंजिला मोती रेजिडेंसी के तीसरे फ्लोर के फ्लैट नंबर ए-305 में विद्युत विभाग के रिटायर्ड एक्सईएन केदारनाथ गौड़ (76) परिवार सहित रहते थे। वह करीब चार साल से सोसायटी में रह रहे थे। प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले बेटे राजेश गौड़ के मुताबिक उनके पिता केदारनाथ रोजाना शाम उनके दोनों बच्चों और फ्लैट नंबर- 302 में रहने वाले आभास कुमार की बेटी मिल्की के साथ सोसायटी के पार्क में जाते थे।
गुरुवार शाम करीब सवा पांच बजे उनका बेटा आदित्य और मिल्की पार्क में चले गए। कुछ समय बाद केदारनाथ बच्चों को देखने फ्लैट से निकल गए। राजेश गौड़ का कहना है कि थोड़ी देर बाद ही उनके पड़ोसी आभास भी अपने फ्लैट से निकले तो लिफ्ट का दरवाजा खुला हुआ था। नीचे झांककर देखा तो ग्राउंड फ्लोर पर उनके पिता केदारनाथ पड़े थे। शोर मचाने पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
नहीं थी लिफ्ट की चाबी, बाहर निकालने को तोड़ना पड़ा गेट
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर पर जाकर केदारनाथ ने बाहर निकालने की कोशिश की तो लिफ्ट की चाबी नहीं मिली। जिसके चलते सरिया व लोहे की रॉड से लिफ्ट का गेट तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। इस प्रक्रिया में करीब आधा घंटा लग गया। आनन-फानन में केदारनाथ को गाजियाबाद के निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके बेटे राजेश गौड़ ने लिफ्ट खराब होने के कारण घटना होने का हवाला देते हुए थाने में तहरीर दी।
5 साल से लिफ्ट में थी दिक्कत, बिल्डर ने नहीं सुना
घटना के बाद सोसायटी के रेजिडेंट्स ने बिल्डर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा और नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि लिफ्ट में आ रही दिक्कत को लेकर बिल्डर से कई बार शिकायत की गई लेकिन उसने कोई सुनवाई नहीं की। बिल्डर की लापरवाही से ही रिटायर्ड एक्सईएन को जान से हाथ धोना पड़ा। सोसायटी के लोगों ने बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते लिफ्ट ठीक करा दी गई होती तो हादसे में केदारनाथ गौड़ की जान नहीं जाती।
दरवाजा खुला पर आई नहीं लिफ्ट
रेजीडेंसी में रहने वाले का कहना है कि केदारनाथ गौड़ ने नीचे पार्क में जाने के लिए लिफ्ट का बटन दबाया था। लिफ्ट का दरवाजा तो खुल गया, लेकिन लिफ्ट तकनीकी खराबी के चलते वापस ऊपर चली गई। जैसी ही केदारनाथ ने पैर आगे बढ़ाया, वह तीसरी मंजिल से नीचे ग्राउंड फ्लोर पर आ गिरे और उनकी मौत हो गई।
हादसे के बाद जागा जीडीए
बताया जा रहा है कि उक्त सोसायटी को अभी कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं मिला था, लेकिन इसके बावजूद फ्लैट धारकों को पजेशन दे दी गई। बृहस्पतिवार को हादसा होने के बाद जीडीए के अधिकारियों ने नोटिस जारी करने की बात कही है।