कानपुर के बिकरू गांव में मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी और पांच लाख का इनामी बदमाश विकास दुबे आज उज्जैन से गिरफ्तार हुआ है। बताया जा रहा है कि उसकी यह गिरफ्तार एक तरह से आत्मसमर्पण ही है और वो भी बड़े ही फिल्मी अंदाज में की गई है। उज्जैन में गिरफ्तारी से पहले वह यूपी के शिवली और फरीदाबाद में रहा लेकिन पुलिस और स्थानीय खुफिया विभाग को इसकी भनक तक नहीं हुई। जानिए कैसे हुई विकास दुबे की गिरफ्तारी और कैसे वह लगभग एक हफ्ते तक पुलिस से बचता हुआ तीन राज्यों में घूमा...
Vikas Dubey News: कानपुर एनकाउंटर के बाद दो दिन शिवली फिर फरीदाबाद में रहा विकास दुबे, फिल्मी अंदाज में उज्जैन में किया सरेंडर
बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर के मामले में बुधवार को गिरफ्तार हुए बदमाशों ने बड़ा खुलासा किया है। बताया है कि वारदात को अंजाम देने के बाद विकास दुबे व उसके दो साथी शिवली में एक दोस्त के घर छिपे रहे थे। उसके बाद ट्रकों के जरिये अलग-अलग शहर होते हुए हरियाणा के फरीदाबाद पहुंचे। साफ है कि वारदात के बाद कानपुर नगर और देहात पुलिस खाक छानती रही और खूंखार बदमाश उसकी नाक के नीचे से फरार हो गए। पुलिस की लापरवाही का खुलासा डीजी मुख्यालय से जारी प्रेसनोट में भी किया गया है।
पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश की कार्रवाई के बाद से रिश्तेदार भी अब उससे पनाह देने से कन्नी काटने लगे। ऐसे में एक बैग में सिर्फ दो जोड़ी कपड़े और पैरों में स्लीपर पहने विकास दुबे दर-दर की ठोकरें खा रहा था। उसके पास ज्यादा पैसे भी नहीं बचे। फरीदाबाद में गिरफ्तार हुए आरोपियों प्रभात उर्फ कार्तिकेय, श्रवण और अंकुर से पुलिस को पूछताछ के बाद यह जानकारी हाथ लगी है। आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि 2 जून को कानपुर में हुए एनकाउंटर के बाद विकास दुबे को यह अहसास हो चुका था कि अब पुलिस उसे छोड़ेगी नहीं। इसलिए वह आनन-फानन में अपने साथ एक बैग में सिर्फ दो जोड़ी कपड़े ही ले पाया। जल्दी में वह जूते भी नहीं पहन पाया। स्लीपर डालकर और थोड़ी नकदी लेकर वह कानपुर से भाग निकला था। इस दौरान उसके साथ दोनों बॉडीगार्ड कार्तिकेय उर्फ प्रभात और अमर दुबे भी आए थे।
वारदात के बाद विकास के साथी अलग-अलग रास्तों से फरार हुए। कोई बाइक तो कोई साइकिल से गया। विकास खुद साइकिल से खेतों के रास्ते शिवली पहुंचा था। उसके साथ अमर दुबे और कार्तिकेय भी थे। तीनों भागकर शिवली पहुंचे और दो दिन तक छिपे रहे। उसके बाद कार्तिकेय अलग व विकास-अमर एक साथ बाइक से लखनऊ की ओर रवाना हुए। आगे इन दोनों ने बाइक छोड़ दी। बाइक कहां है, इसकी जांच जारी है। आगे अमर और विकास ट्रक पकड़ कर हरियाणा पहुंचे। यहां पहले होटल और फिर बाद में अंकुर के घर को ठिकाना बनाया। हैरानी की बात ये है कि घटना के कुछ ही देर बाद पुलिस ने रेंज की सीमाएं सील कर दी थीं। जिला पुलिस उसके परिचितों व रिश्तेदारों के घर पर दबिश डाल रही थीं तो सवाल है कि आखिर कानपुर देहात और नगर पुलिस शिवली में विकास को घेर क्यों नहीं सकी।
लापरवाही का नतीजा, विकास की फरारी
अगर सही से सीमाएं सील करके उसके दोस्तों के घरों पर दबिश दी जाती तो विकास घटना के कुछ ही घंटे बाद गिरफ्तार हो जाता। वह बेखौफ होकर एक ही घर में पड़ा रहा। जिससे मामला थोड़ा शांत हो जाए। वही हुआ, पुलिस सड़कों पर नजर आई और फिर गायब हो गई। जब पुलिस का मूवमेंट कम हुआ तो सब फरार हो गए। इससे साफ है कि पुलिस की एक लापरवाही की वजह से खूंखार विकास दुबे इतने दिन तक फरार रहा।