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जब महात्मा गांधी को नहीं मिला था कन्याकुमारी के मंदिर में प्रवेश, छुआछूत नहीं कुछ और थी वजह

Tue, 01 Oct 2019 02:03 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Tue, 01 Oct 2019 02:03 PM IST
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Gandhi Jayanti 2019 special Bapu was not allowed to enter temple in Kanyakumari
महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

समानता का अधिकार और कथित नीची जाति के लोगों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन छेड़ने के कारण दुनिया भर में महात्मा गांधी को जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार राष्ट्रपिता को अपने ही देश में मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि उन्हें जाति-धर्म या छुआछूत के कारण नहीं रोका गया था। आगे पढ़िए क्या थी असली वजह: 

Gandhi Jayanti 2019 special Bapu was not allowed to enter temple in Kanyakumari
महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

बात 1925 की है, जब इंग्लैड से लौटे गांधी ने कन्याकुमारी के अम्मान मंदिर में जैसे ही प्रवेश के लिए कदम बढ़ाया तो उन्हें रोक दिया गया। जिसके बाद उन्हें मंदिर के बाहर खड़े होकर पूजा-अर्चना करनी पड़ी थी। 

Gandhi Jayanti 2019 special Bapu was not allowed to enter temple in Kanyakumari
महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला

दरअसल इसके पीछे उनका धर्म या जाति वजह नहीं थी, बल्कि सात समंदर पार विलायत यात्रा पर जाने के कारण उन्हें मंदिर के अंदर जाने से रोका गया था। उन दिनों समुद्र पार कर विदेश जाने वालों को अछूत माने जाने की परंपरा थी। 

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Gandhi Jayanti 2019 special Bapu was not allowed to enter temple in Kanyakumari
महात्मा गांधी - फोटो : Social Media

गांधी जी ने मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने की घटना पर उन्होंने एक आलेख भी लिखा जिसका शीर्षक है ‘कन्याकुमारी के दर्शन’। इस आलेख में गांधी जी ने कहा कि वहां भी मेरी प्रसन्नता पर दुख का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मुझे पूरे मंदिर की परिक्रमा करने की अनुमति दे दी गई, लेकिन मुझे मंदिर के भीतरी हिस्से में नहीं जाने दिया गया क्योंकि मैं इंग्लैंड गया था।

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Gandhi Jayanti 2019 special Bapu was not allowed to enter temple in Kanyakumari
महात्मा गांधी

महात्मा गांधी का यह आलेख 29 मार्च 1939 को प्रकाशित हुआ था। उस समय भारतीय हिंदू समाज में समुद्र पार करना और विदेश जाना हीन माना जाता था। ऐसे में शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद ही मंदिरों में प्रवेश किया जा सकता था। आलेख में गांधी जी ने कहा है कि मेरी अंतरआत्मा चीख रही है कि ऐसा नहीं हो सकता। परिणामस्वरूप इस बात को लेकर मेरा विश्वास बढ़ गया है कि इस कलंक को हटाने के लिए अधिक बलशाली प्रयोग करना प्रत्येक हिंदू का दायित्व है। 

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