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शीला दीक्षित ने इंदिरा को खिलाई थीं जलेबियां...ससुर उमाशंकर ने बाथरूम में इसलिए कर दिया था बंद

Sat, 20 Jul 2019 07:18 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Sat, 20 Jul 2019 07:18 PM IST
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Former Delhi CM Sheila Dikshit memories with Indira Gandhi Rajeev Gandhi and Uma Shankar Mishra
शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला

शीला दीक्षित ने राजनीति के गुर सीखे अपने ससुर उमाशंकर दीक्षित से, जो इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में गृह मंत्री हुआ करते थे और बाद में कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी बने। एक दिन उमाशंकर दीक्षित ने इंदिरा गांधी को खाने पर बुलाया और शीला दीक्षित ने उन्हें भोजन के बाद गर्मागर्म जलेबियों के साथ वनीला आइसक्रीम सर्व की। शीला दीक्षित बताती थीं, "इंदिराजी को ये प्रयोग बहुत पसंद आया। अगले ही दिन उन्होंने अपने रसोइए को इसकी विधि जानने के लिए हमारे यहां भेजा। उसके बाद कई बार हमने खाने के बाद मीठे में यही सर्व किया, लेकिन इंदिरा गांधी के देहांत के बाद मैंने वो सर्व करना बंद कर दिया।''


 

जब ससुर ने किया बाथरूम में बंद

Former Delhi CM Sheila Dikshit memories with Indira Gandhi Rajeev Gandhi and Uma Shankar Mishra
शीला दीक्षित-इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कोलकाता से जिस विमान से राजीव गांधी दिल्ली आए थे, उसमें बाद में भारत के राष्ट्रपति बने प्रणब मुखर्जी के साथ-साथ शीला दीक्षित भी सवार थीं। शीला बताती थीं, इंदिराजी की हत्या की खबर सबसे पहले मेरे ससुर उमाशंकर दीक्षित को मिली थी, जो उस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। जैसे ही विंसेंट जॉर्ज के एक फोन से उन्हें इसका पता चला, उन्होंने मुझे एक बाथरूम में बंद कर दिया और कहा कि मैं किसी को इसके बारे में न बताऊं। जब शीला दिल्ली जाने वाले जहाज में बैठीं तो राजीव गांधी को भी इसके बारे में पता नहीं था। ढाई बजे वो कॉकपिट में गए और बाहर आकर बोले कि इंदिरा जी नहीं रहीं। 


 

मुख्यमंत्री बनकर क्या किया?

Former Delhi CM Sheila Dikshit memories with Indira Gandhi Rajeev Gandhi and Uma Shankar Mishra
sheila dikshit - फोटो : social media

जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने शीला दीक्षित को अपने मंत्रिमंडल में लिया पहले संसदीय कार्य मंत्री के रूप में और बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री के रूप में। 1998 में सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। वो न सिर्फ चुनाव जीतीं बल्कि लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं।  शीला दीक्षित से ये पूछे जाने पर कि 15 साल के उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रहीं तो वे कहती थीं, ' पहला 'मेट्रो', दूसरा 'सीएनजी' और तीसरा दिल्ली की हरियाली, स्कूलों और अस्पतालों के लिए काम करना। ''इन सबने दिल्ली के लोगों की निजी जिंदगी पर बहुत असर डाला। मैंने पहली बार लड़कियों को स्कूल में लाने के लिए उन्हें 'सेनेटरी नैपकिन' बंटवाए। मैंने दिल्ली में कई विश्वविद्यालय बनवाए और 'ट्रिपल आईआईटी' भी खोली।''



 
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जब हुई फ्लैट की जांच

Former Delhi CM Sheila Dikshit memories with Indira Gandhi Rajeev Gandhi and Uma Shankar Mishra
sheila dikshit - फोटो : अमर उजाला

दिलचस्प बात ये है तीन बार चुनाव जीतने के बावजूद कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने उनका विरोध करना जारी रखा। नौबत यहां तक आई कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष रामबाबू गुप्त ने, जो दिल्ली नगर निगम के सभासद भी थे, उनके निजामुद्दीन ईस्ट वाले फ्लैट की जांच के आदेश दे दिए कि कहीं उसमें भवन निर्माण कानूनों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "जिस घर में आप बैठे हुए हैं, उसी घर में दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने इस बात की जांच की थी कि कहीं उसमें कोई अवैध निर्माण तो नहीं हुआ है।" "जब उन्हें कुछ नहीं मिला तो उन्होंने मेरी बहन से फ्लैट के कागजात मांगे, जो उन्हें उपलब्ध कराए गए और ये तब हुआ जब मैं दिल्ली की मुख्यमंत्री थी। ये बताता है कि राजनीति किस हद तक नीचे जा सकती है।"

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नहीं मानीं स्वामी जी की बात

Former Delhi CM Sheila Dikshit memories with Indira Gandhi Rajeev Gandhi and Uma Shankar Mishra
sheila dikshit - फोटो : अमर उजाला

शीला के कार्यकाल के दौरान एक चुनौती और आई जब राष्ट्रमंडल खेल गांव के बगल में बने अक्षरधाम मंदिर के स्वामी ने उनसे मांग की कि खेलगांव में सिर्फ शाकाहारी भोजन ही परोसा जाए। शीला याद करती हैं, ''स्वामीनारायण मंदिर के स्वामी को इस बात की अनुमति नहीं है कि वो महिलाओं की तरफ देखें। इसलिए जब वो मुझसे मिलने आए तो उन्हें दूसरे कमरे में बैठाया गया। जब भी उन्हें कुछ कहना होता तो एक संदेशवाहक उनका संदेश लेकर आता और फिर मुझे उसका जो उत्तर देना होता, वो भी एक संदेश वाहक ही उनके पास ले कर जाता।''  

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