भजनपुरा के सुभाष मोहल्ला की गली इतनी सकरी थी कि वक्त पर बचाव दल भी मौके पर नहीं पहुंच पाया। बचाव दल के आने से पहले ही मोहल्ले के लोग मलबे से बच्चों को बचाने पहुंच गए। लेकिन एम्बुलेंस के वक्त पर पहुंचने से पहले ही मलबे में दबे चार बच्चों ने दम तोड़ दिया। जबकि अध्यापक की भी मौत हो गई। बाकी के घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
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घायल बच्चे को ले जाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
सुभाष मोहल्ला का गली नंबर छह उस वक्त चीख पुकार से गूंज उठा, जब एक मकान की छत भरभरा कर उसमें पढ़ रहे बच्चों पर गिर पड़ा। मलबे में दबे लोगों की चीख सुनकर हर कोई मदद के लिए उस ओर भागा, लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी।
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घटनास्थल पर मौजूद भीड़
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मलबे के ढेर में दबे चार बच्चों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। घटनास्थल की गलियां इतनी सकरी थी कि वहां बचाव दल का वक्त पर पहुंचना नामुमकिन सा था। किसी तरह मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ी एक किलोमीटर पीछे ही खड़ा करना पड़ा। इसके बाद दमकल कर्मियों को पैदल ही मौके पर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वक्त पर अगर बचाव दल आ गया होता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
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घटनास्थल पर मौजूद भीड़
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उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त वेद प्रकाश सूर्या ने बताया कि गली नंबर-6, सुभाष मोहल्ला, भजनपुरा में एजुकेशनल प्वाइंट के नाम से दूसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा था। कोचिंग सेंटर हरिशंकर और उमेश उर्फ बल्लू नामक युवक चलाते थे। यहां सभी क्लासों की कोचिंग दी जाती थी। पिछले कुछ दिनों से कोचिंग सेंटर के ठीक ऊपर एक और मंजिल बनाने का काम चल रहा था।
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गिरे हुए इमारत का मलबा
- फोटो : अमर उजाला
अचानक निर्माणाधीन तीसरी मंजिल का मलबा कोचिंग सेंटर की छत पर आ गिरा। गाटर और टुकड़ी की छत होने के कारण छत मलबे का वजन नहीं सह पाई और गिर गई। हादसे में नीचे के कमरों में पढ़ रहे करीब दर्जनभर छात्र व दोनों शिक्षक उमेश व हरिशंकर दब गए। मलबा गिरने की आवाज हुई तो स्थानीय लोग मदद को भागे। फौरन मलब में दब बच्चे को निकालकर वहां से नजदीकी जग प्रवेश चंद अस्पताल ले जाया गया। जहां चार बच्चों व एक शिक्षक को मृत घोषित कर दिया गया।