कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को देशभर में बुलाए गए भारत बंद के दौरान राजधानी समेत एनसीआर में हालात पूरी तरह सामान्य रहे। राजधानी के सभी बाजार खुले रहे, वहीं सड़कों पर भी आम दिनों की तरहर ट्रैफिक सामान्य रहा। दिनभर दिल्ली पुलिस अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के साथ बाजारों में गश्त करते रहे। राजधानी की सभी सीमाओं पर ड्रोन से हालात पर नजर रखी गई। तस्वीरोें में देखें पूरे बंद का हाल...
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सिंघु बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन
- फोटो : जी पाल
विशेष आयुक्त लॉ एंड ऑर्डर सतीश गोलचा ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कहीं से भी किसी तरह हंगामा की कोई सूचना नहीं मिली है। दिल्ली पुलिस की ओर से किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया। चिल्ला, गाजीपुर, टिकरी और सिंघु बार्डर पूरी तरह बंद रहे। दोपहर बाद तीन बजे गाजीपुर बार्डर पर दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले कैरेजवे को वाहन चालकों के लिए खोल दिया गया।
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का दृश्य
- फोटो : शुजात आलम
भारत बंद को लेकर किसानों ने राजधानी की सभी सीमाओं को बंद करने की बात की थी। लेकिन कुछ जगहों को छोड़कर बाकी बार्डर पर हालात पूरी तरह सामान्य रहे। दिल्ली पुलिस ने बदरपुर बार्डर, कालिंदीकुंज, डीएनडी, चिल्ला, न्यू अशोक नगर, नोएडा सेक्टर-11 (मयूर विहार), गाजीपुर (दिल्ली गेट), कौशांबी (आनंद विहार), अप्सरा बार्डर, भोपरा बार्डर, सिंघु, टिकरी, दिल्ली-गुरुग्राम, ढांसा आदि बार्डर पर सुरक्षा के कड़े इंताजम किए थे।
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यूपी गेट का हाल
- फोटो : शुजात आलम
लगातार यहां ड्र्रोन से नजर रखी जा रही थी। किसान नेताओं ने सभी से अपील की थी कि बंद के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा न करें। टिकरी, गाजीपुर बार्डर व चिल्ला बार्डर पर किसान थोड़ा उग्र नारेबाजी करते हुए दिखे, लेकिन किसी ने भी शांति भंग नहीं की। संयुक्त आयुक्त, डीसीपी, एसीपी और सभी एसएचओ अपने-अपने इलाकों में गश्त पर रहे। कहीं भी किसी तरह के जोरजबरदस्ती की सूचना नहीं मिली।
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Farmers protest
- फोटो : जी पाल
भारत बंद के लिए दिल्ली पुलिस के 40 हजार जवानों के अलावा अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को सुरक्षा के लिए लगाया गया था। साउथ एक्सटेशन पार्ट-1, पार्ट-2, जीके, लाजपत नगर, डिफेंस कालोनी, कनॉट प्लेस, कोटला मुबारक पुर, सरोजनी नगर व कुछ अन्य बाजारों में आम दिनों की तरह चहल-पहल रही। हालांकि सरोजनी नगर मार्केट के दुकानदारों ने अपने हाथ पर काली पट्टी बांधकर किसानों का समर्थन किया। ज्यादातर लोगों का कहना था कि सरकार को किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए।