जिले में बढ़ते सड़क हादसों पर काबू पाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, बावजूद इसके हर दिन कहीं न कहीं लोग वाहनों की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। चालकों की लापरवाही के अलावा सड़कों की खस्ता हालत भी दुर्घटनाओं के पीछे एक बड़ा कारण है। सड़कों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की साल भर कवायद होती है, फिर भी हादसों का न रुक पाना बड़ा सवाल है।
कैसे थमें सड़क हादसेः हर दो दिन में एक व्यक्ति की टूट रही सांसों की डोर
- इस साल 122 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। यानी हर माह करीब 15 लोग काल के शिकार हो रहे हैं। जिले में नेशनल हाईवे और स्टेट हाई के साथ शहर में भी वाहन चालकों को थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ रही है।
- हिट एंड रन के मामलों की जांच का कार्य ट्रैफिक पुलिस से कराया जा रहा है। वहीं, हादसा संभावित 11 जगहों पर सड़कों में सुधार के साथ-साथ सीसीटीवी लगाने पर भी जोर है।
ये हैं 11 हादसा संभावित स्थान
पुलिस आयुक्त ओपी सिंह ने सड़क हादसों पर काबू पाने के लिए रोड सेफ्टी ऑडिट कराया है। इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस के कार्यों में भी सुधार किया है। इस क्रम में ट्रैफिक पुलिस द्वारा हादसा संभावित 11 स्थानों को चिन्हित किया गया है। इनमें नीलम चौक, न्यू आईएमटी राउंडसेक्टर 48 में स्थित मस्जिद तथा श्मशान घाट, बल्लभगढ़-सोहना रोड पर स्थित सनी यादव फार्म हाउस, लखानी मेट्रो स्टेशन, लखानी धर्मशाला, बल्लभगढ़ अनाज मंडी कट, चंदावली पुल बाईपास, क्रॉउन इंटीरियर्ज मॉल, सराय ख्वाजा बाईपास रोड तथा सीएचसी तिगांव शिव कॉलेज रोड शामिल हैं। इन स्थानों पर वर्ष 2020 में 30 हादसे हुए थे। इनमें 12 लोगों की जान गई और 31 व्यक्ति घायल हुए थे।, वहीं वर्ष 2021 में जुलाई तक इन स्थानों पर 16 हादसे हुए हैं, जिनमें सात लोगों की मौत व 11 व्यक्ति घायल हुए हैं।
पुलिस ने 60 फीसदी मामलों को सुलझाया
इस साल पुलिस ने सड़क हादसों से जुड़े करीब 60 फीसदी मामलों को सुलझाया है। सामान्य सड़क हादसे अलग हैं। 122 लोगों की मौत के अलावा, कुछ अन्य हादसे भी हैं, जिनमें लोग घायल हुए, लेकिन मौत नही हुई।
हादसों की प्रमुख वजह
अधिकतर हादसे गलत दिशा में वाहन चलाने, ओवर स्पीडिंग, बिना सीट बेल्ट व ड्रंकन एंड ड्राइव की वजह से हुए।
क्या रखें सतर्कता
- गाड़ियों के ब्रेक, लाइट्स और टायर्स आदि बेहतर कंडीशन में हो।
- पुरानी गाड़ियों या फिर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगे।
- सभी गाड़ियों में सीट बेल्ट सहित अन्य ज़रूरी सुरक्षा उपायों के मेंटेनेंस को सख्ती से लागू किया जाए।
सड़कों में हो सुधार
- सड़कों का निर्माण और टूटी-फूटी सड़कों को दुरुस्त किया जाना चाहिए। साथ ही सभी सड़कों पर पर्याप्त सुरक्षा संकेतों का प्रयोग किया गया हो।
- सड़कों पर पैदल चलने वाले यात्रियों, धीमे चलने वाले वाहनों और तेज़ व भारी वाहनों के परिचालन की अलग व्यवस्था हो।
- सड़कें चौड़ी हो और उस पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो।
महत्वपूर्ण सड़क सुरक्षा नियम
- सड़क पर अपने बायीं तरफ होके चलना चाहिए। खासतौर से चालक को और दूसरी तरफ से आ रहे वाहन को जाने देना चाहिए।
- चालक को सड़क पर गाड़ी घुमाते समय गति धीमी रखनी चाहिए
- अधिक व्यस्त सड़कों और रोड जंक्शन पर चलते समय ज्यादा सावधानी बरतें।
- दोपहिया वाहन चालकों को अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट पहनने चाहिए। बिना हेलमेट के रोड पर नहीं आना चाहिए।
- गाड़ी की गति निर्धारित सीमा तक ही रखें। खासतौर से स्कूल, हॉस्पिटल, कॉलोनी आदि क्षेत्रों में।
- सभी वाहनों को दूसरे वाहनों से निश्चित दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
- सड़कों पर चलने वाले सभी लोगों को रोड पर बने संकेतकों और नियमों की अच्छे से जानकारी होनी चाहिए।
- यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा के नियम-कानूनों को दिमाग में रखें।
घायल की अनदेखी न करें, तत्काल अस्पताल पहुंचाएं
किसी व्यक्ति की दुर्घटना हो जाने की स्थिति में अगले एक घंटे की अवधि को ‘गोल्डेन आवर’ कहा जाता है। 95% फीसदी मामलों में इस दौरान उचित मेडिकल सहायता मिल जाने पर घायल व्यक्ति की जान बच सकती है। डॉक्टर्स और आम लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए।
हाइवे या व्यस्त सड़कों पर जगह-जगह प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होने चाहिए, ताकि समय रहते दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाई जा सके। अस्पतालों और डॉक्टर्स को सड़क दुर्घटना से प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत इलाज़ के प्रति तत्पर और संवेदनशील बनने की ट्रेनिंग दी जाए।
हादसा संभावित 11 जगहों पर ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। यातायात जागरूकता, ट्रैफिक चालान व साइन बोर्ड लगवाए गए हैं। सड़क हादसे कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
-सुरेश हुड्डा, डीपीसी ट्रैफिक