इन नकली नोटों संग गुलशन भाभी और पाकिस्तान-चीन कनेक्शन ने उड़ा दी है खुफिया एजेंसियों की नींद
गत शुक्रवार को एनएच-58 से जाली नोट संग पकड़े गए दो युवकों से बरामद नई करेंसी के नोटों की क्वालिटी ने देश की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। गाजियाबाद में नए नोटों की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद एनआईए और आईबी समेत अन्य खुफिया एजेंसियों ने गाजियाबाद में डेरा डाल दिया। खुफिया एजेंसियों की आरोपियों से की गई करीब दो घंटे की पूछताछ में जानकारी मिली है कि चीन और पाकिस्तान से वाया नेपाल और बिहार के रास्ते जाली नोट लाकर दिल्ली-एनसीआर में खपाए जा रहे हैं। वहीं, शक जताया जा रहा है कि दो हजार के नोटों की छपाई पाकिस्तान या चीन की करेंसी प्रिंटिंग प्रेस में ही गई है।
बृहस्पतिवार रात 2000 और 500 की नकली करेंसी के साथ दो युवकों के पकड़े जाने के बाद शुक्रवार सुबह सबसे पहले एनआईए (नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी) की टीम थाना सिहानी गेट पहुंची। टीम ने करीब सवा घंटे आरोपी मोहम्मद अली और विनोद से पूछताछ की। इसके बाद आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो), यूपी एसटीएफ, एटीएस और एलआईयू की टीमों ने भी दोनों आरोपियों से जानकारियां जुटाईं। सूत्रों की मानें तो दोनों से मिली जानकारी के आधार पर ही पुलिस यह दावा कर रही है कि चीन से वाया नेपाल और बिहार के रास्ते जाली नोट दिल्ली-एनसीआर में खपाए जा रहे हैं। एसएसपी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों के साथ पुलिस ने भी कई अहम जानकारी दोनों से जुटाई हैं। इनके आधार पर नकली नोट छापने वाले गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। नोटबंदी के बाद गाजियाबाद में पहली बार नई करेंसी के जाली नोट पकड़े गए हैं। ऐसे में पुलिस को शक है कि जाली नोटों के कारोबार से जुड़े कई लोग गाजियाबाद में हो सकते हैं।
हल्के कागज से हो रही दो हजार के नोटों की पहचान: पुलिस की जांच में सामने आया है कि बरामद किए गए दो हजार की नई करेंसी के जाली नोट पहली नजर में बिल्कुल असली नोट जैसे ही दिखते हैं। नोट छापने वालों ने मंगलयान की फोटो का साइज, गांधी जी की तस्वीर के नीचे की स्ट्रिप, दाईं ओर बनी सिक्योरिटी पट्टी और बाएं किनारे पर बनी काली रेखाएं भी हूबहू छापी गई हैं। सिर्फ कागज कुछ हल्का होने के चलते जाली करेंसी की पहचान हो सकी है।
चीन और नेपाल के रास्ते भारत में लाए जाते थे नकली नोट: पुलिस के अनुसार बिहार के रक्सौल बार्डर से नकली नोट की भारत में प्रवेश कराई जा रही है। यहां से बिहार से होते हुए यह रकम शामली के कैराना में रहने वाले अरविन नामक युवक के पास पहुंचती है। पुलिस के अनुसार कैराना को नकली नोटों की मंडी कहा जाता है। वहीं, से नोट एनसीआर के अन्य इलाकों में सप्लाई किए जाते हैं।