दिल्ली को ट्रकों के प्रदूषण और उससे होने वाले जाम से बचाने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया(एनएचएआई) ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तैयार कर लिया है। यह बाहरी राज्यों में जाने वाले वाहन दिल्ली के बाहर-बाहर से निकाल देगा। इसकी इतनी सारी खूबियां हैं कि आप यह खबर पढ़कर ही खुश हो जाएंगे।
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eastern peripheral expressway
इसे बनाने के लिए दुनिया के 20 देशों का अध्ययन किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है, जिसमें वाहनों का वजन एंट्री प्वाइंट पर पहुंचने से पहले ही हो जाएगा और यह डिसाइड हो जाएगा कि उक्त वाहन की एंट्री होनी है कि नहीं।
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दिलचस्प ये है कि अगर वाहन ओवरलोड पाया गया तो एंट्री प्वाइंट के बजाय अपने आप ही एक्जिट गेट खुल जाएगा। यह एक्सप्रेसवे कुंडली(दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर) से पलवल तक 6 लेन वाला और 135 किलोमीटर लंबा है। इसे बनाने की लागत 12 हजार करोड़ रुपए आई है।
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एनएचएआई के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि इस एक्सप्रेवे में मौजूद कई लैंडमार्क पूरे विश्व के लिए उदाहरण बनेंगे। एनएचएआई के सीजीएम और इस प्रोजेक्ट के प्रमुख बीएस सिंघला ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे को बनाने का समय 30 महीने रखा गया था लेकिन इसे 18 माह में ही पूरा कर लिया गया।
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29 अप्रैल को होगा उद्घाटन, 135 किमी. की दूरी होगी 70 मिनट में पूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन यूपी के बागपत से 29 अप्रैल को करेंगे। यह देश का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जिसमें बगीचे बने हैं। इस एक्सप्रेवे पर वाहनों की स्पीड लिमिट 120 किमी/घंटा तय की गई है। इस स्पीड से जाने पर आप 135 किमी की दूरी 70 मिनट में माप सकेंगे। वहीं कुंडली टोल प्लाजा पर डिजिटल गैलरी भी बन रही है। इसमें सब कुछ वर्चुअल होगा जिसे एनएचएआई प्रोजेक्ट की सफलता के तौर पर दिखाएगा।