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Delhi NCR News: अल्जाइमर की गंभीरता बढ़ने के साथ बढ़ता है सूजन का संकेतक
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इहबास के अध्ययन में अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया मरीजों में बढ़ा मिला सूजन से जुड़ा आईएल-6 प्रोटीन
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। अल्जाइमर को केवल भूलने की बीमारी समझना सही नहीं है। इस बीमारी में याददाश्त कमजोर होने के साथ मस्तिष्क में होने वाली सूजन भी अहम है। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के एक अध्ययन में अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया से पीड़ित मरीजों में सूजन से जुड़े एक खास प्रोटीन का स्तर स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक पाया गया है।
अध्ययन में कुल 110 लोगों को शामिल किया गया। इनमें अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया के मरीजों के साथ स्वस्थ लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने सभी प्रतिभागियों के शरीर में इंटरल्यूकिन-6 (आईएल-6) नामक इन्फ्लेमेटरी मार्कर के स्तर की जांच की। आईएल-6 शरीर में सूजन और प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों से जुड़ा होता है।
शोध में पाया गया कि अल्जाइमर के मरीजों में बीमारी की गंभीरता बढ़ने के साथ आईएल-6 का स्तर भी अधिक था। इससे संकेत मिलता है कि बीमारी बढ़ने के दौरान शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रिया अधिक सक्रिय हो सकती है। हालांकि, केवल आईएल-6 का स्तर बढ़ना अल्जाइमर होने का प्रमाण नहीं है और इसे बीमारी की पहचान का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता।
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मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश के मुताबिक, अल्जाइमर में मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच कुछ खास प्रोटीन जमा होने के अलावा इन्फ्लेमेशन यानी सूजन भी बीमारी को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। यह सूजन शरीर के बाहर दिखाई देने वाली सूजन जैसी नहीं होती, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के स्तर पर होने वाली रासायनिक और प्रतिरक्षा संबंधी प्रक्रिया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को समझना भविष्य में अल्जाइमर के बेहतर इलाज और रोकथाम में मददगार हो सकता है। सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाली उपचार पद्धतियों पर आगे शोध की संभावना है, हालांकि इसके लिए अभी और अध्ययन जरूरी हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। अल्जाइमर को केवल भूलने की बीमारी समझना सही नहीं है। इस बीमारी में याददाश्त कमजोर होने के साथ मस्तिष्क में होने वाली सूजन भी अहम है। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के एक अध्ययन में अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया से पीड़ित मरीजों में सूजन से जुड़े एक खास प्रोटीन का स्तर स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक पाया गया है।
अध्ययन में कुल 110 लोगों को शामिल किया गया। इनमें अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया के मरीजों के साथ स्वस्थ लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने सभी प्रतिभागियों के शरीर में इंटरल्यूकिन-6 (आईएल-6) नामक इन्फ्लेमेटरी मार्कर के स्तर की जांच की। आईएल-6 शरीर में सूजन और प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों से जुड़ा होता है।
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शोध में पाया गया कि अल्जाइमर के मरीजों में बीमारी की गंभीरता बढ़ने के साथ आईएल-6 का स्तर भी अधिक था। इससे संकेत मिलता है कि बीमारी बढ़ने के दौरान शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रिया अधिक सक्रिय हो सकती है। हालांकि, केवल आईएल-6 का स्तर बढ़ना अल्जाइमर होने का प्रमाण नहीं है और इसे बीमारी की पहचान का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता।
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मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश के मुताबिक, अल्जाइमर में मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच कुछ खास प्रोटीन जमा होने के अलावा इन्फ्लेमेशन यानी सूजन भी बीमारी को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। यह सूजन शरीर के बाहर दिखाई देने वाली सूजन जैसी नहीं होती, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के स्तर पर होने वाली रासायनिक और प्रतिरक्षा संबंधी प्रक्रिया है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को समझना भविष्य में अल्जाइमर के बेहतर इलाज और रोकथाम में मददगार हो सकता है। सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाली उपचार पद्धतियों पर आगे शोध की संभावना है, हालांकि इसके लिए अभी और अध्ययन जरूरी हैं।