दिल्ली महिला आयोग ने लड़कियों के बाल विवाह की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। आयोग ने बुधवार को सभी जिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर जानकारी मांगी है।
इनसे पूछा गया है कि बाल विवाह के कितने मामले सामने आए और इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई। जिलाधिकारियों को 25 जनवरी तक जवाब भेजना है। आयोग की तरफ से भेजे नोटिस में लिखा गया है कि बीते कुछ समय में बाल विवाह की कई शिकायतें आयोग के सामने आईं हैं।
कुछ मामलों में पाया गया कि बाल विवाह निषेध कानून ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। साथ ही ऐसा करवाने को वालों को दंड दिलवाने में असफल रहा है। जिसके बाद आयोग ने इस कानून के क्रियान्वयन का आकलन करने का फैसला किया है।
इसी के तहत जिलाधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने पूछा है कि वर्ष 2013 से अब तक बाल विवाह के कितने मामले सामने आए हैं। इन पर क्या कार्रवाई की गई है, क्या बाल विवाह निषेध अधिकारी लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप का आयोजन करते हैं, क्या वह समय-समय पर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हैं।
इस कानून का पालन कराने में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति जय हिंद का कहना है कि लड़कियों के बाल-विवाह पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। रोक तभी संभव है जब बाल विवाह निषेध कानून का सख्ती से पालन करवाया जाए।