दिल्ली हिंसा ने कई लोगों के जीवन से रंग ही छीन लिया है। हिंसा के दौरान जिन लोगों के घर तबाह हुए थे, वे राहत कैंप में रहने को मजबूर हैं। इन्हीं राहत कैंप में साहिबा भी रहती है, जिसने शुक्रवार को एक बच्चे को जन्म दिया।
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दिल्ली हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
साहिबा हिंसा के दिन की कहानी को याद करते हुए बताती है कि उस दिन उपद्रवियों ने हमारे घर को तहस-नहस कर दिया था। रहने का कोई ठिकाना नहीं बचा। मजबूरन राहत शिविर में शरण लेनी पड़ी। साहिबा के पति ने बताया कि वह वैशाली में एक निजी कंपनी में करता है। दहशत की वजह से वह दफ्तर भी नहीं जा रहा है।
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ईदगाह राहत शिविर
- फोटो : Amar Ujala
बारिश ने बढ़ाई शिविर में रहने वालों की परेशानी
हिंसा प्रभावित लोगों के लिए मुस्तफाबाद ईदगाह में राहत शिविर तो बनाए गए थे, लेकिन यहां रह रहे लोगों की परेशानी बारिश के कारण बढ़ गई है। जमीन पर बिछाए गए उनके गद्दे गीले हो गए हैं। इस कारण उनके लिए सो पाना मुश्किल हो गया है। शुक्रवार को हुई तेज बारिश के कारण भी उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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ईदगाह राहत शिविर
- फोटो : Amar Ujala
मुस्तफाबाद की ईदगाह में शिविर में करीब 1500 पीड़ित रह रहे हैं। यहां पुरुषों व महिलाओं के रहने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कैंप में सुविधा तो मिल रही है, लेकिन रात में सोने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण गद्दे गीले हो जाते हैं। उधर, वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि बारिश की समस्या को देखते हुए लकड़ी के करीब 300 तख्ते मंगाए गए हैं। इन्हें गद्दे के नीचे लगाया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि पीड़ितों की संख्या को देखते हुए लकड़ी की तख्तों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
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ईदगाह में लोगों ने की नमाज अदा
- फोटो : अमर उजाला
उधर, कैंप में रह रहे लोगों को कोरोना के प्रकोप से बचाने के लिए मास्क भी बांटे जा रहे हैं। वक्फ बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि शुरुआती तौर पर करीब दो हजार मास्क बांटे गए हैं। साथ ही, वक्फ के कर्मचारियों को भी मास्क लगाकर काम करने की हिदायत दी जा रही है।