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गलियों में वर्दीधारी, डरे-सहमे लोग घरों में बंद होकर खिड़कियों के सहारे देख रहे मंजर

Thu, 27 Feb 2020 11:21 AM IST
पूजा त्रिपाठी अभिषेक पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
अभिषेक पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 27 Feb 2020 11:21 AM IST
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Delhi violence force in lanes scariness in environment people watching from their windows in horror
delhi violence - फोटो : अमर उजाला

हंसती-खेलती गलियों में बुधवार की सुबह 10 बजे खौफ का अजीब-सा मंजर था। हर तरफ सन्नाटा परसा था और गलियां पूरी तरह सूनी थीं। डरे-सहमे लोग घरों में बंद थे और खिड़कियों के सहारे बाहर का मंजर देख रहे थे। इन हालात को देख मैंने करावल नगर के शिव विहार तिराहे पर लोगों को तलाशने का प्रयास किया, ताकि उनकी आपबीती जान सकूं।



Delhi violence force in lanes scariness in environment people watching from their windows in horror
delhi violence - फोटो : शुभम बंसल

हर ओर सुरक्षा बलों को देखकर किसी ने भी बात करने की हिम्मत नहीं जुटाई। जो लोग हिम्मत जुटाकर दर्द बयां करने पहुंचे भी, उन्हें पुलिस ने डांट-फटकार कर फिर घरों के अंदर भेज दिया। पत्रकार होने के नाते मैंने उनसे बात करने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने हालात खराब होने की बात कही।

Delhi violence force in lanes scariness in environment people watching from their windows in horror
delhi violence - फोटो : शुभम बंसल
मैं शिव विहार और चमन पार्क इलाके में हालात को समझने पहुंचा था। वहां हर तरफ राख के ढेर और सड़कों पर ईंट-पत्थर ही दिख रहे थे। शिव विहार तिराहे के पास उपद्रवियों का शिकार हुए राजधानी पब्लिक स्कूल में बच्चों की जली बेंच ही दिख रही थीं। स्कूल की बिल्डिंग जलकर धुआं के रंग में हो गई थी।
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delhi violence - फोटो : शुभम बंसल
स्कूल के बाहर बैठे पुलिसवाले भी आपस में बात कर रहे थे कि उपद्रवियों की मासूम बच्चों के स्कूल से क्या दुश्मनी थी। शुक्र है कि घटना के वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे।
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delhi violence - फोटो : पीटीआई
यह मंजर देखने के बाद मैं मुस्तफाबाद की ओर बढ़ रहा था कि रास्ते में पुलिसवालों ने रोक लिया। मेरे मीडिया से संबंधित होने की बात बताने पर पास में ही मौजूद केंद्रीय बलों के जवानों ने आगे जाने की इजाजत दे दी।
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